सुप्रीम कोर्ट ने कहा-दायें-बायें-केंद्र, हर जगह हो रहा बलात्कार: इस बीच यूपी के हरदोई और हरियाणा के नूह के शेल्टर-होम के मामले हुए उजागर


सुशील मानव 

मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि देश भर में 'लेफ्ट, राईट, सेंटर हर जगह हो रहे महिलाओं से बलात्कार।


कोर्ट ने सवाल किया कि अभी तक अधिकारी क्‍या कर रहे थे और किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई क्‍यों नहीं हुई है? कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछले कई सालों से बिहार सरकार इस एनजीओ को फंड देती रही, लेकिन उसे ये नहीं पता कि ये फंड वो क्यों दे रही है? फंड जारी करने से पहले सरकार को इसके बारे में जांच करनी चाहिए थी।



बिहार सरकार ने मामले को हलका करने के लिए कहा कि 'वह वक्त-वक्त पर सोशल ऑडिट करती है, कुछ बुरे अफसर भी होते हैं।' इस पर कोर्ट ने पूछा कि उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने घटना की जांच में विलंब पर भी नाराजगी जताई और मामले की जांच रिपोर्ट भी मांगी। उसने सवाल किया कि अभी तक अधिकारी क्‍या कर रहे थे और किसी बड़े अधिकरी पर कार्रवाई क्‍यों नहीं हुई है? इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के आरोपियों में से एक की पत्नी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। महिला पर कुछ नाबालिग पीड़िताओं की पहचान और नाम सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर मौजूद अपने एकाउंट पर उजागर करने का आरोप है।

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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए देश भर के शेल्टर होम पर अलग-अलग सरकारों ने निगरानी बढ़ा दी है। इस क्रम में उत्तरप्रदेश के हरदोई और हरियाणा के नूह में सम्बंधित जिलाधिकारियों ने कार्रवाई की है। हरदोई और नूह के मामले की रिपोर्ट बता रहे हैं सुशील मानव 

हरदोई यूपी के महिला स्वाधार गृह से 19 महिलायें लापता

देवरिया के बाद अब उत्तर प्रदेश के ही दूसरे जिले के स्वाधार गृह से 19 महिलाओं के लापता होने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बता दें कि कल हरदोई के डीएम पुलकित खरे बेनीगंज कस्बे के मोहल्ला कृष्णा नगर में संचालित महिला स्वाधारगृह में औचक निरीक्षण करने पहुँच गए। निरीक्षण के दौरान स्वाधारगृह के रजिस्टर में 21 महिलाओं का नाम दर्ज मिला पर मौके पर सिर्फ दो महिलाएं ही मिलीं। स्वाधारगृह अधिक्षिका बाकी के 19 औरतों के बाबत कुछ नहीं बता सकीं। बता दें कि इस महिला स्वाधारगृह को सन 2001 से आयशा ग्रामोद्योग संस्था द्वारा संचालित किया जा रहा था। डीएम पुलकित खरे ने संस्था का अनुदान तत्काल रोकते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश कर दी है।

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वहीं देवरिया के माँ विंध्यवासिनी शेल्टर होम से कई और सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। सूचना मिली है कि संस्था की मान्यता भले जून 2017 से रद्द की गई हो लेकिन संस्था का फंड तीन साल से रोक लगा दिया गया था। बता दें कि सीबीआई की जाँच में प्रदेश में हुए पालना घोटाला में माँ विंध्यवासिनी संस्था का भी नाम सामने आया था जिसके बाद महिला बाल विकास की प्रमुख सचिव ने संस्था को मिलने वाली सरकारी मदद पर रोक लगा दी थी। बावजूद इसके न संस्था का संचालन रुका और न ही पुलिस द्वारा वहाँ लड़कियों को भेजने का सिलसिला। संस्था के आँकड़ें बताते हैं कि पिछले तीन साल में माँ विंध्यवासिनी के स्वाधारगृह और बालगृह में 707 लड़कियों को पहुँचाया गया जिनमें से 697 को बाद में उनके परिवार के पास भेज दिया गया था। जबकि दस लड़कियाँ अभी भी रह रही थीं। बच्चियों ने पूछताछ में बताया है कि उन्हें एक रात के लिए 200-300 रुपए भुगतान भी किए जाते थे।
दिल्ली के बिहार भवन पर प्रदर्शन 


आँकड़ों के मुताबिक माँ विंध्यवासिनी के स्वाधार गृह में 2016-17 में 127, सन 2017-18 में 155 और सन 2018-19 में 55 लड़कियाँ/औरतें यहाँ लाई गईं जबकि माँ विंध्यवासिनी के बालिका बालगृह में सन 2016-17 में 135, सन 2017-18 में 165 व सन 2018-19 में 70 लड़कियां अब तक यहाँ पुलिस द्वारा पहुँचाई गई थी।
वहीं एक पीड़ित पिता का आरोप है कि वह पिछले दस रोज में आठ बार अपने बेटी से मिलने के लिए मां विंध्यवासिनी शेल्टर होम गया था लेकिन उसे उसकी बेटी से एक बार भी नहीं मिलने दिया गया। दरअसल बरहज थाना क्षेत्र की रहने वाली एक किशोरी अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गई थी। जिसे पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज करके प्रेमी समेत बरामद करके 25 जुलाई को माँ विंध्यवासिनी के बालिकगृह में हिरिजा त्रिपाठी के संरक्षण में रखवा दिया गया था।

पिता का आरोप है कि बेटी के यहाँ रखने के बाद अपनी बेटी से मिलने के लिए पिता पिछले दस दिन में आठ बार आया और उसने अपने बेटी से मिलने देने की मिन्नत भी की पर गिरिजा त्रिपाठी ने उन्हें एक बार भी अपने बेटी से नहीं मिलने दिया गया। जबकि पिता द्वारा लाए हुए खाने-पीने की चीजों को उनसे ले लिया जाता था ये कहकर कि उनकी बेटी तक पहुँचा दिया जाएगा।

वहीं 31 जुलाई को तरकुलवा पुलिस एक लड़की को बाल संरक्षणगृह से जूडिशियल कार्य के लिए ले गई थी । कोर्ट से ही युवती फरार हो गई लेकिन बालिका संरक्षण गृह की ओर से किसी भी जिम्मेवार अफसर को कोई सूचना नहीं दी गई। दूसरे दिन रात को पुलिस उक्त लड़की को लेकर संरक्षण गृह पहुँची। उस एक रात लड़की कहाँ और किसके साथ रही इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

जबकि रविवार को छापेमारी में मुक्त कराई गई 24 लड़कियों में से 13 नाबालिग हैं। वहीं दूसरी ओर गोद लेने की आँड़ में बच्चों की तस्करी का भी मामला गहराता जा रहा है। बताया जाता है कि मां विंध्यवासिनी बालिका बालगृह में रह रहे कई बच्चियों को विदेशियों को भी गोद दिया गया है। पिछले ही साल 6 बच्चों को विदेशियों को गोद दिया गया है। कारण पूछने पर आरोपी संचालिका गिरिजा त्रिपाठी कोर्ट के आदेश का हवाला देती है।
वहीं बसपा सरकार के समय रहे देवरिया के डीएम का माँ विंध्यवासिनी शेल्टर होम में बहुत आना-जाना था। फोन पर बात-चीत भी होती थी। उनका ट्रांसफर होने के बाद देवरिया के डीएम बने कुमार रविकांत के मुताबिक जब उनके सीयूजी पर फोन आना शुरू हुआ तो उन्होंने तत्कालीन एसपी को मामले की जाँच करने को कहा था। जबकि एसपी ने जाँच तत्कालीन सी सिटी डीके पुरी को सौंप दी थी। 

हरियाणा के नूह  में अतिआधुनिक तरीके से शोषण
देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद जागा प्रशासन, कई शोल्टर होमों में छापेमारी के बाद सेक्स रैकेट का खुलासा
स्त्रीकाल, राइड फॉर जेंडर फ्रीडम,टेढ़ी उँगली एनएफआईडब्ल्यू और ऐपवा के साझा प्रयास से बालगृहों में बच्चों बच्चियों संग हो रहे यौन उत्पीड़न के खिलाफ हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद से देश का सोया प्रशासन जाग पड़ा है उसी का नतीजा है कि यूपी के देवरिया और हरदोई के शेल्टर होमों में अनियमितता और सेक्स रैकेट के खुलासे के बाद अब हरियाणा के नूह में एक शेल्टर होम ऑरफन एंड नीड एनजीओ द्वारा संचालित बालगृह में भारी गड़बड़ी पाई गई है।

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बता दें कि हरदोई के डीएम ने जहाँ औचक निरीक्षण कर 19 महिलाओं के लापता होने का पर्दाफाश किया वहीं हरियाणा के नूह जिले की बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ज्योति बैंदा ने भी औचक छापेमारी करके बालगृह में भारी गड़बड़ी और संदिग्ध गतिविधियों के होने का खुलासा किया है। बच्चों संग यौनशोषण की संभवना बीच सभी बच्चों-बच्चियों को मेडिकल जाँच के लिए भेजा जाएगा।बालगृह में 38 लड़के लड़कियों को बिना किसी रिकार्ड के रखा गया था। ये सभी बच्चे एक ही धर्म विशेष के हैं। किसी फाइव स्टार होटल की तर्ज पर बनाए गए इस बालगृह में एक तहखाना भी मिला है। इस तहखाने का रास्ता ऑफिस से होकर जाता है जिसके ऊपर एक ढक्कन लगाकार बंद करके रखा जाता था। जिसमें मॉनीटरिंग के लिए कंप्यूटर रखे गए थे। ज्योति बैंदा के अनुसार बालगृह से जब्त किए गए डॉक्युमेंट संबंधित एक्ट के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। यहाँ रखे गए बच्चों को कब और कहाँ से लाया गया इसका कोई रिकार्ड बालगृह के पास नहीं है।


नियम के अनुसार किसी जिले में जब कोई बच्चा मिलता है तो उसे जिले के संबंधित बालगृह में भेज दिया जाता है। लेकिन चौंकाने वाली बात यही कि इस बालगृह में मिले सभी बच्चे एक धर्म विशेष के हैं जिन्हें यहाँ पर पलवल से लाया गया था। हैरानी की बात ये है कि इस बालगृह का बाल कल्याण समिति और बाल कल्याण अधिकारियों द्वारा दौरा किया जाता रहा है लेकिन उन्होंने अपनी जाँचों में कभी कुछ क्यों नहीं पाया।
पूरा मामला नूह जिले के सेसौला गाँव के बालगृह का है।बालगृह में रखे बच्चों को उनके परिवार से नहीं मिलने दिया जाता था। उन बच्चों से यहाँ तक लिखवाकर रखा जाता था कि गर किसी दुर्घटना मेंबच्चों को कुछ हो जाता है तो संस्थान की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। ये बालगृह सन 2016 से संचालित हो रहा था।


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