जब पक्ष-विपक्ष के लोगों ने महिला विधायक पर की द्विअर्थी टिप्पणियाँ ( बिहार विधानसभा में अश्लील टिप्पणियों का वह माजरा)


दिव्या 

श्री इंदर सिंह नामधारी : माननीय अध्यक्ष महोदय, विरोधी दल में एक ही महिला सदस्य हैं उनको भी यह सरकार संतुष्ट नहीं कर पा रही है. 
श्री वृषिण पटेल : अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री ने कहा कि लम्बा-चौड़ा  है, माननीय सदस्या भी लेने को तैयार हैं तो क्यों नहीं माननीय सदस्या एकांत में जाकर ले लेते हैं। 

महिलाओं के लिए राजनीति का डगर कठिन रहा है. विधायिका में रही महिलाओं के अनुभव से इसे समझा जा सकता है. हालांकि माहौल में एक सकारात्मक बदलाव है.

महिला प्रतिनिधित्व को कुंद करने वाली एक घटना तब बिहार विधानसभा में 1983 में घटी थी, 22 जुलाई, 1983 को,  तब खबरिया चैनल नहीं थे, दूरदर्शन तक भी लोगों की पहुँच नहीं थी. अध्यक्ष के आसन पर बैठे थे राधानंद झा. उस विधानसभा के सदस्य बाद में बिहार की राजनीति का पर्याय बन गये लालू प्रसाद भी थे. 324 सदस्यों वाले सदन में महिलाओं की कुल संख्या 11 थी, यानी लगभग 3%.

तब सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने महिला विधायक पर अश्लील टिप्पणी की थी. विडंबना है कि एक विधायक तो अपमानित सदस्या की पार्टी से थे. सदस्या ने तब पुरजोर आपत्ति की तो टिप्पणियाँ हटाई गयीं. पूरा मामला तब के दिनमान में छपा था. सदस्या के अनुसार सदन में उपस्थित पत्रकारों ने भी मामले को हंस कर टाल दिया था.



अश्लील टिपण्णी करने वाले सदस्य थे इंदरसिंह नामधारी और वृषिण पटेल, जिस पर टिप्पणी की गयी थी, वह थीं रमणिका गुप्ता. इंदर सिंह नामधारी बाद में झारखंड विधान सभा के अध्यक्ष हुए और वृषिण पटेल कई सरकारों में मंत्री बने. वृषिण पटेल उसी पार्टी लोकदल (नेता कर्पूरी ठाकुर) के सदस्य थे जिसकी सदस्य थीं अपमानित हुईं रमणिका गुप्ता. रमणिका गुप्ता कहती हैं कि ‘जेंडर के आधार पर मुझे गालियां कई बार खानी पडीं. एकबार मैं कोई मुद्दा उठाते हुए टेबल पर चढ़ गयी तो एक नेता चिल्लाये, ‘नाच नचनिया नाच.’ऐसे कई अनुभव रमणिका अपने राजनीतिक जीवन के दौरान का बताती हैं. रमणिका यह भी जोडती हैं, ' मेरी सीट के तब पीछे ही बैठने वाले लालू प्रसाद ऐसी ओछी टिप्पणियों से दूर रहते थे.'
देखें क्या थी सदन की पूरी कार्यवाही :

अल्पसूचित  प्रश्न संख्या 159

श्री लहटन चौधरी (मंत्री) : 1.  उत्तर स्वीकारात्मक है।
2. विस्तृत पड़ताल के उपरान्त पुनर्वास योजना तैयार कर ली गयी है और इसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय को भेज दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा योजना का अंतिम रूप दिए जाने के पश्चात ही इसका कार्यान्वयन हो सकेगा।
रमणिका गुप्ता : यह योजना कब भेजी गयी है?
श्री लहटन चौधरी (मंत्री): कल भजेा गया है।
श्रीमती रमणिका गुप्ता: अध्यक्ष महोदय...
अध्यक्ष : अब इसमें क्या पूछियेगा? यह कोर्ट में लम्बित है।
श्रीमती रमणिका गुप्ता : अध्यक्ष महोदय, मैं जानना चाहती हूं...
अध्यक्ष : माननीय मंत्री इससे संबंधित जितने कागजात हैं सब इनको दे दीजियेगा।
श्रीमती रमणिका गुप्ता : मैं जानना चाहती हूं कि योजना क्या है?
लहटन चौधरी (मंत्री) : योजना बहुत थोड़ी है।

पूर्व विधायक रमणिका गुप्ता अब दिल्ली में रहती हैं 

श्रीमती रमणिका गुप्ता : जमीन के बदले जमीन देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश था।
अध्यक्ष : आपने प्रश्न किया कि ‘विस्थापितों के पुनर्वास की योजना बनाने का आदेश 1982 में दिया’ तो इन्होने  कहा, ‘हां’। फिर आपने पूरक पूछा कि ‘योजना कब भेजी गयी’ तो इन्होंने कहा ‘कल’, तब और इसमें क्या चाहिए?
श्रीमती रमणिका गुप्ता : सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश था कि जमीन के बदले जमीन देंगे वह आपने भेजा है कि नहीं?
अध्यक्ष : माननीय सदस्या, जो कागज माननीय मंत्री ने भेजा है उसको आप देख लेंगे।
श्री इंदर सिंह नामधारी : माननीय अध्यक्ष महोदय, विरोधी दल में एक ही महिला सदस्य हैं उनको भी यह सरकार संतुष्ट नहीं कर पा रही है. 
श्री वृषिण पटेल : अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री ने कहा कि लम्बा-चौड़ा  है, माननीय सदस्या भी लेने को तैयार हैं तो क्यों नहीं माननीय सदस्या एकांत में जाकर ले लेते हैं। 
अध्यक्ष : माननीय मंत्री सारी सूचना आप माननीय सदस्या को भेज देंगे।
श्री लहटन चौधरी (मंत्री) : मैं पूरी योजना माननीय सदस्या को भेज दूंगा और सूचना की एक प्रति भी भेज दूंगा।
अध्यक्ष : माननीय सदस्या रमणिका गुप्ता की भावनाओं को देखते हुए वृषिण पटेल जी ने जो कहा है उसको एक्सपंज किया जाये।
श्रीमती रमणिका गुप्ता : अध्यक्ष महादेय, मुझे आपका प्रोटेक्शन चाहिए। ये लागे गन्दी-गन्दी अश्लील बातें करते हैं।
जो इंदरसिंह नामधारी जी ने कहा है उसको भी हटाया जाय और जो वृषिण पटेल का रिमार्क भी हटाया जाए यह विधानसभा है कुजरा सभा नहीं है। आइन्दा दो अर्थी बातें कहने से रोका जाए।
अध्यक्ष : दोनों के रिमार्क को एक्सपंज करता हूं।

वृषिण पटेल 


अल्पसूचित प्रश्न संख्या 160
डॉ. उमेश्वर प्रस्रसाद वर्मा : 1. उत्तर स्वीकारात्मक है।
2. उत्तर स्वीकारात्मक है।
3. श्री विनोद कुमार यादव के साथ-साथ शेष छह लोगों के मामले पर पुनः समीक्षा की जा रही है।
श्री लालू यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं मूल प्रश्न पूछता हूं कि जब आपने एक छंटनीग्रस्त को रखा है तो सभी छंटनीग्रस्त को रखने में क्या आपत्ति है? मुख्य अभियन्ता ने यह कहकर छंटनी की है कि राज्य मंत्री का मौखिक आदेश है लेकिन जब कोंसिल में प्रश्न हुआ तो राज्यमंत्री ने इस बात से इनकार किया। इसलिए मैं जानना चाहता हूं कि मुख्य अभियन्ता ने इस तरह सदन को जो गुमराह किया है और गरीबों को छंटनीग्रस्त कर दिया है उन पर आप कार्रवाई करेंगे?
अध्यक्ष : माननीय मंत्री, आप सबको रख लें।

विधान सभा कार्यवाही का वह हिस्सा 



इस घटना के आलोक में रमणिका जी ने दिनमान के सम्पादक को लिखा. 

सदस्य
बिहार विधानसभा
3884 अफसर्स कॉलोनी,
न्यू पुनाई चक, पटना-23
दिनांक : 1983
प्रिय महोदय,
दिनांक 22-7-83 को बिहार विधानसभा में अश्लील मजाक की एक घटना घटी थी जिसे उपस्थित पत्रकारों के द्वारा भी हंस कर भुला दिया गया। लेकिन वह मजाक और उस पर सदन की प्रतिक्रिया भारतीय समाज में नारी की स्थिति की द्योतक है। उस मजाक के मनोविज्ञान और सदन की मानसिकता का विश्लेषण करते हुए मैंने अध्यक्ष को एक पत्रा लिखा ताकि इस पर एक बहस शुरू की जा सके। लेकिन उन्होंने न तब उस मजाक को और न बाद में उसकी समीक्षा को अपेक्षित गंभीरता से लिया। मुझे लगता है कि इस बहस को जनता के बीच ले जाने की
जरूरत है। अध्यक्ष को सम्बोधित वह पत्र संलग्न है। आपका पत्र राजनीतिक सामाजिक दुर्व्यवस्था का मुखर आलोचक रहा है। इसलिए ही इस पत्र को प्रकाशनार्थ आपके यहां भेज रही हूं। इसमें मेरा उद्देश्य यही है कि जुडे हुए मुद्दों पर एक सार्थक बहस शुरू की जा सके।
प्रतिः
संपादक, दिनमान,
दिल्ली।
(रमणिका गुप्ता)
स. वि. स

अध्यक्ष को लिखा पत्र उपलब्ध तो नहीं हो पाया लेकिन रमणिका बताती हैं कि इसपर कोई बहस उन्होंने नहीं करवायी.

दिव्या फ्रीलांस पत्रकार हैं,  चाँदचौरा, गया, बिहार  में रहती हैं.

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