भाजपा का चार साल: प्रधानमंत्री से नाराज आधी आबादी


डेस्क 

भाजपा की अगुआई में एनडीए सरकार अपने चार साल पूरे होने का जश्न मना रही है. हालांकि विरोधी पार्टियां इस अवसर पर मंहगाई और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी भी कर रही हैं. इस बीच सरकार पर सवाल आधी आबादी की ओर से भी उठने लगे हैं.



महिलाओं के संगठनों ने पिछले कुछ महीनों में दर्जनो पत्र प्रधानमंत्री नरेंद मोदी को भेजकर उनसे समय माँगा है, लेकिन प्रधानमंत्री उन्हें मिलने का समय नहीं दे रहे. कारण है भाजपा के घोषणा पत्र में महिला आरक्षण के लिए किया गये वादे पर मोदी सरकार की बेरुखी.

भाजपा ने 2014 में अपने घोषणापत्र में लिखा था कि " भाजपा संविधान संशोधन के जरिये संसद एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान करने को प्रतिबद्ध है.' हालांकि पार्टी ने पिछले चार सालों में इस मुद्दे पर कभी कोई पहल नहीं की.  महिलाओं के एक प्रतिनिधि मंडल से इस मसले पर बातचीत के लिए सरकार के ताकतवर मंत्री अरुण जेटली ने महज दो-तीन मिनट का समय दिया था. उनके व्यवहार से आहत महिला समाजकर्मी स्पष्ट हो चुके थे कि सरकार इस विषय को ठंढे बस्ते में डाल चुकी है. इस बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने  आदि ने महिला आरक्षण पास करने को समय की जरूरत बताया. सोनिया गांधी ने सितंबर 2017 में ही इस मसले पर प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी. लेकिन प्रधान मंत्री मोदी की इस विषय पर चुप्पी और सरकार द्वारा चार सालों में कोई पहल न किया जाना सरकार की उदासीनता का संकेत है.
बीजेपी के घोषणापत्र का एक हिस्सा 


महिला अधिकार कार्यकर्ता पद्मिनी कुमार कहती हैं कि 'भाजपा ऐसी स्थिति में थी कि वह अपने बूते पर इस बिल को पास करा ले जाती. राज्यसभा से यह बिल पहले ही पारित हो चुका है. लोकसभा में भाजपा को पूर्ण बहुमत है और एनडीए तथा कांग्रेस को मिलाकर संविधान संशोधन के लिए इनके पास पर्याप्त संख्या बल है.' गौरतलब है कि लोकसभा में भाजपा के अकेले 281 सदस्य थे, जबकिउपचुनावों में हार और कर्नाटक से येदुरप्पा और एक अन्य सांसद के इस्तीफे के बाद यह संख्या 271 (बहुमत से एक कम) हो गयी है.

भाजपा के महिला नेता और उसके महिला मोर्चे की अध्यक्ष विजया रहटकर पार्टी के स्तर पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कराने के लिए अपने बड़े नेताओं को श्रेय देती हैं लेकिन पार्टी के महिला मोर्चे के पास महिला आरक्षण बिल पारित कराने के लिए कोई कार्यक्रम नहीं है. ऑफ़ द रिकार्ड बातचीत में भाजपा की कई महिला नेता संकेत देती हैं कि जबतक प्रधानमंत्री इस मसले पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ते हैं तबतक पार्टी का कोई नेता-महिला या पुरुष इसपर पहल नहीं ले सकता. महिला क़ानून के जानकार सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अरविंद जैन कहते है 'इरादे के अभाव में महिला आरक्षण अगले 100 साल तक पास नहीं होने वाला.

सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखी गयी चिट्ठी 


संसद के आगामी सत्र के पूर्व इस मुद्दे पर प्रधनामंत्री को घेरने का मन महिला संगठन बना रहे हैं, लेकिन एक कार्यकर्ता के अनुसार 'दिल्ली में प्रदर्शन या चिट्ठी-पत्री से सरकार पर कोई असर नहीं होने वाला इसके लिए हर संसदीय क्षेत्र में घोषणापत्र से वादाखिलाफी के मुद्दे पर महिलाओं को आन्दोलन करना चाहिए.' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'जब तक इस मसाले पर 'महिला आरक्षण के भीतर वंचित समाज की महिलाओं का आरक्षण की मांग करते हुए ग्रामीण स्तर से बड़ा आन्दोलन नहीं शुरू होता, डगर बहुत कठिन रहने वाली है. तय है कि 2019 के घोषणापत्र में भी भाजपा इस वादे को दुहरायेगी जरूर.

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