पत्रकारिता के निम्नतम स्तर पर पहुंचा टाइम्स नाउ : महिला पत्रकार और कानूनविद


अविका 

गोवा में यौन-शोषण का वीडियो फुटेज दिखाकर टाइम्स नाउ ने किया महिला का अपमान और क़ानून का उल्लंघन.



 तहलका में काम करने वाली पत्रकार का उसके पूर्व सम्पादक तरुण तेजपाल द्वारा यौन-शोषण के संबंध  में 28 मई 2018 को वीडियो फुटेज दिखाने के बाद टाइम्स नाउ विवादों के घेरे में है. महिला पत्रकारों के समूह ने इस पर रोष व्यक्त किया है वहीं कई कानूनविद इसे पीडिता की छवि खराब करने की कोशिश बता रहे हैं. 'द नेटवर्क ऑफ़ वीमेन इन मीडिया' ने इस संबंध में टाइम्स के प्रबंधक समूह को पत्र लिखकर 28 मई को क्रमशः 8 और 9 बजे शाम की शो को अनैतिक और गैरकानूनी बताया है. महिला पत्रकारों के अनुसार वे शो धारा 327(2) और (3) का उल्लंघन है.  'द नेटवर्क ऑफ़ वीमेन इन मीडिया' इसे  रेप सर्वायावर महिला का अपमान और उसकी छवि खराब करने का प्रयास मानता है.

पढ़ें  'द नेटवर्क ऑफ़ वीमेन इन मीडिया'  का पूरा  पत्र 

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और महिला कानूनों के विशेषज्ञ अरविंद जैन भी कहते हैं "मामला न्यायालय के अधीन है. सत्र न्यायालय ने आरोप तय कर दिया है. अभियुक्त आरोप के खिलाफ हाई कोर्ट गया, जहां अपील निरस्त हो गयी है तो अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. चार्ज के लिए प्रथम दृष्टया देखा जाता है कि कोई ऑफेंस बनता है कि नहीं. सुप्रीम कोर्ट में लिफ्ट के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपील की गयी है. टाइम्स नाउ को वह फुटेज मिला है तो जाहिर है कहाँ से मिला होगा.

टाइम्स नाऊ उसी फुटेज को बार-बार दिखा रहा है. हालांकि उसमें बार-बार यह कहा जा रहा है, ऐंकर द्वारा कहा जा रहा है कि फुटेज से यह सिद्ध तो होता है कि कुछ हुआ है और यह भी सिद्ध नहीं होता कि कंसेंट था. लेकिन उसने जो पैनल बैठा रखा है, वह अभियुक्त का वकील है. वह कह रहा है कि लडकी ने सौ करोड़ रूपये की मांग की थी.कुल मिलकर जब मामला चार्ज के स्तर पर है, निर्णय बाकी है तब फुटेज दिखाकर बार-बार विवरण दिया जा रहा है, लड़की की छवि भी खराब करने की कोशिश हो रही है. दिखता हुआ यह कार्यक्रम तेजपाल के खिलाफ है लेकिन वास्तव में यह पीडिता को ही कठघरे में खडा करने की मंशा से दिखाया जा रहा है.

यह सारा प्रकरण कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट है. आप चार्जशीट फ़ाइल होने के बाद और ट्रायल शुरू होने के बाद ऐसा नहीं कर सकते. साथ ही वह जो वकील सौ करोड़ मांगने की बात बिना प्रूफ के कह रहा है वह भी प्रोफेशनल एथिक्स के खिलाफ है, मानहानि इसमें बनता है.

क्या था तरुण तेजपाल के खिलाफ आरोप 
तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ पश्चिमी गोवा के मापुसा की एक निचली अदालत ने सितंबर 2017 में ही आरोप तय कर दिये थे. इस मामले की पीड़िता ने यह आरोप लगाया था कि नवंबर, 2013 में तहलका मैगज़ीन की तरफ़ से आयोजित एक इवेंट में उनके साथ बदसलूकी की थी. लिफ्ट में उनके साथ जबरदस्ती ओरल की कोशिश की. तरुण तेजपाल को इस केस में 30 नवंबर 2013 को गिरफ़्तार किया गया था. उन पर आईपीसी की धारा 341 (ग़लत तरीक़े से नियंत्रण), धारा 342 (ग़लत तरीक़े से बंधक बनाना), धारा 354-ए (किसी महिला के साथ यौन दुर्व्यवहार और शीलभंग की कोशिश), धारा 376 (बलात्कार) लगाई गई है. बाद में आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 की धारा 376 (2)(के) के तहत भी आरोप लगाया गया है, जिसका मतलब है कि एक ऐसे व्यक्ति के द्वारा बलात्कार की कोशिश जो महिला का संरक्षक हो.

तरुण तेजपाल भारत में स्टिंग पत्रकारिता के शिखर लोगों में से एक रहे हैं. तेजपाल के तहलका मैगज़ीन के एक स्टिंग ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को काफ़ी परेशान किया था. तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

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