माँ-बहन की गालियाँ देने वाले लोगों के तार सत्ताधीश से क्यों जुड़े होते हैं?


स्त्रीकाल डेस्क 

फॉरवर्ड प्रेस के हिन्दी संपादक नवल किशोर कुमार को मिल रही हैं धमकियां, दी जा रही हैं गालियाँ. नवल  ने 27 मई को एक फेसबुक पोस्ट के जरिये बिहार में कई नरसंहारों के सरगना बरमेसर मुखिया की प्रतिमा स्थापित करने का विरोध किया था. 1 जून को स्थापित की जाने वाली प्रतिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में खबर है कि भाजपा-जदयू के कई नेता शामिल होने वाले हैं. शर्मा, उपाध्याय, सिंह, भूमिहार आदि टाईटल धारी यूजर दे रहे गालियाँ. 

शर्मा, उपाध्याय, सिंह, भूमिहार आदि टाईटल धारी यूजर दे रहे गालियाँ 


सोशल मीडिया पर एक ख़ास समूह है जो गालियों और धमकियों के माध्यम से लोगों को, पत्रकारों को, सामाजिक कार्यकर्ताओं को चुप्प कराना चाहता है. प्रायः ऐसे लोगों के तार राजनीतिक और सामाजिक सत्तावानों से जुड़े होते हैं. ऐसे कई लोगों को प्रधानमंत्री द्वारा भी फॉलो किये जाने की खबरें आती रहती हैं. ताजा मामला फॉरवर्ड प्रेस के हिन्दी संपादक नवल कुमार को मिल रही धमकियों का है. नवल कुमार को गालियाँ देने वाले लोग रणवीर सेना के समर्थक बताये जाते हैं.
बरमेसर मुखिया की स्थापित की जाने वाली प्रतिमा


नवल कुमार को मिल रही धमकियों और गालियों की जानकारी फॉरवर्ड प्रेस के समूह संपादक प्रमोद रंजन ने एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से दी. प्रमोद रंजन ने लिखा:

फारवर्ड प्रेस के हिंदी-संपादक नवल किशोर कुमार (Naval Kumar) को ब्रह्मेश्वर मुखिया के समर्थकों से जान से मार डालने की धमकियां मिल रही हैं। पिछले 24 घंटे से उन्हें लगातार गालियों से भरे फोन आ रहे हैं। इन धमकियों में कहा जा रहा है कि बिहार में रह रहे उनके परिवार की महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाएगा तथा उन्हें दिल्ली आकर मार डाला जाएगा। धमकियां उनके फेसबुक पेज पर कमेंट में भी दी जा रही हैं।

नवल किशोर रणवीर सेना पर काम करने वाले देश के प्रमुख पत्रकारों में से एक हैं। उन्होंने न सिर्फ सेना की कारगुजारियों का विस्तृत अध्ययन किया है, बल्कि ब्रह्मेश्वर मुखिया का एकमात्र उपलब्ध मुकम्मल वीडियो इंटरव्यू भी उन्होंने किया था, जो फारवर्ड प्रेस में प्रकाशित हुआ था तथा हमारे यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है।

दरअसल, 1 जून, 2018 को भोजपुर जिला के खोपिरा में रणवीर सेना ब्रह्मेश्वर मुखिया की प्रतिमा की स्थापना करने जा रही है। वर्ष 2012 में इसी दिन उसे अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से भून दिया था। मुखिया के हत्यारों का आज तक पता नहीं चल सका। मामले की जांच सीबीआई कर रही है। रणवीर सेना के लोग अपने नायक की हत्या की बरसी मनाने के लिए एक जून को खोपिरा में जुटेंगे। कुछ सरकारी अधिकारियों के संरक्षण में इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।

नवल किशोर कुमार ने तीन दिन पहले -27 मई, 2018 को - अपनी फेसबुक पोस्ट में इस अयोजन का विरोध किया था। उन्होंने 300 से अधिक दलित-पिछडों की नृशंस हत्या के आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया की मौत को 'कुत्ते की मौत' कहा था तथा बिहार में सामंती ताकतों के बढते मनोबल के लिए जदयू-भाजपा की सरकार को आडे हाथों लिया था।

याद दिलाने की आवश्यकता शायद नहीं है कि यह वही ब्रह्ममेश्वर मुखिया है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने अपने लोगों को कहा था कि जहां नरसंहार करने जाओ वहां दलित-पिछडों के बच्चों को भी मत छोडो। वे संपोले हैं, बडे होकर नक्सलवादी बनेंगे। रणवीर सेना से विभिन्न नरसंहारों में दर्जनों बच्चों को गाजर-मूली की तरह काट डाला। गर्भवती महिलाओं के गर्भ चीर डाले। युवतियों के स्तन काट डाले।

ब्रह्मेश्वर मुखिया जैसे लोगों के लिए हमारा स्टैंड पूरी तरह साफ रहा है। उसकी हत्या के बाद हमने फारवर्ड प्रेस (जुलाई,2012) की कवर स्टोरी का शीर्षक दिया था - 'किसकी जादूई गोलियों ने ली बिहार के कसाई की जान'। यह कवर स्टोरी नवल किशोर ने ही लिखी थी। उसी अंक में प्रसिद्ध दलित चिंतक कंवल भारती का भी एक लेख था, जिसका शीर्षक : 'हत्यारे की हत्या पर दु:ख कैसा?' हमारे लिए वह हमेशा एक नरपिशाच, एक हत्यारा रहा है। उसके लिए किसी भी प्रकार के किसी सम्मानजक शब्द के प्रयोग का सवाल ही नहीं उठता।

नवल कुमार का वह पोस्ट जिसके लिए धमकी दी जा रही है

बहरहाल, घमकियों की लिखित शिकायत बिहार के डीजीपी व घमकी देने वाले जिन लोगों के नाम मिल सके हैं, उनके जिलों के एसपी से की जा रही है। फेसबुक कमेंटों में कई जगह दलित समुदाय के लिए भी गालियां दी गई हैं। उनके लिए उपयुक्त पात्रों द्वारा अलग से संबंधित जगहों पर शिकायत भेजी जा रही है।


रणवीर सेना के लोग कान खोल कर सुन लें। हमने सैकडों लोगों की शहादत दी है। हम डरने वाले नहीं हैं।

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