दैनिक जागरण और अन्य मीडिया के अपराधिक खबरों पर जम्मू पुलिस ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति

सुशील मानव 

जम्मू पुलिस ने जम्मू के कठुआ जिले के रसाना गाँव में बकरवाल समुदाय की आठ वर्षीय बच्ची  के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में हिंदी अखबार दैनिक जागरण और अन्य मीडिया समूह द्वारा अपने यहाँ और
सोशल मीडिया में की जा रही झूठी रपटों का खंडन करते हुए विज्ञप्ति जारी की है. पढ़ें क्या कहा है पुलिस ने:

जम्मू के कठुआ जिले के रसाना गाँव में बकरवाल समुदाय की आठ वर्षीय बच्ची  के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में हिंदी अखबार दैनिक जागरण ने  20 अप्रैल 2018 के जम्मू, दिल्ली,लखनऊ,पटना, चंडीगढ़, समेत कई अंको में “बच्ची से नहीं हुआ था दुष्कर्म” हेडलाइन वाली निष्कर्षात्मक खबर छापी थी, और 21 और 21 अप्रैल को कुछ संस्करणों में दुहराया । जबकि दिल्ली की फोरेंसिक लैब एफएसएल ने अपनी रिपोर्ट में बच्ची संग मंदिर में बलात्कार की पुष्टि की है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि मंदिर के अंदर जो खून के धब्बे मिले थे वो पीड़िता के ही हैं। इसके अलावा मंदिर में जो बालों का गुच्छा मिला था जाँच में वो एक आरोपी शुभम संगारा के होने की पुष्टि लैब ने किया है। इसके अलावा पीड़िता के कपड़ों पर मिले खून के धब्बे उसके डीएनए प्रोफाइल से मैच करते हैं। साथ ही पीड़िता की वजाइना पर खून मिलने की पुष्टि लैब ने की हैं।



इसे संघ और भाजपा समर्थक सोशल मीडिया में खूब फैलाया जा रहा है. इसके असर को देखते हुए जम्मू पुलिस ने आज एक प्रेसविज्ञप्ति जारी कर भ्रम दूर किया है. पढ़ें क्या लिखा है विज्ञप्ति में ( हिन्दी अनुवाद):


छः  दिनों से प्रेस/ एलेक्ट्रोनिक मीडिया और सोशल मीडिया हीरानगर, कठुआ, थाने में दर्ज एफआईआर न. 10/2018, दिनांक 12.01.2018, के बारे में कुछ सूचनायें शेयर कर रहे हैं. जांच की सारी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर, एक समुचित कोर्ट के समक्ष  चार्जशीट पेश किया गया था, और जांच एजेंसी एक पूरक चार्जशीट भी दाखिल करने वाली है.

हालांकि पिछले कुछ दिनों से प्रिंट/ एलेक्ट्रोनिक मीडिया ने सच से कोई भी वास्ता न रखने वाली जानकारियाँ प्रकाशित/ प्रसारित किया है और सोशल मीडिया साइट्स पर शेयर भी किया है. इन रिपोर्टों से विवश होकर अंततः हम यह तथ्य सामने रखना चाहते हैं कि मेडिकल विशेषज्ञों की राय द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि पीडिता आरोपियों द्वारा यौन हमले की शिकार हुई थी. मेडिकल विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पीडिता का हाइमीन भी अक्षुण्ण नहीं था. इन चिकित्सकीय निर्णयों के आधार पर आईपीसी की धारा 376 (डी) इस केस में जोड़ी गयी है. इसके अलावा संदेह से परे जाकर चिकित्सकीय निष्कर्ष है कि पीडिता को कैद में रखा गया था और नशे की दवाइयां (दर्द निवारक) दी गयी थीं और मौत का कारण डीएम घुटने से हुआ हृदयघात है.




तस्वीरें गूगल से साभार 
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