स्लिम रहने से ज्यादा जरूरी है स्वस्थ रहना

नीवा सिंह

राष्ट्रीय कैडेट कोर,दिल्ली,  की गर्ल्स कैडेट इंस्ट्रक्टर नीवा सिंह से मासिक फिटनेस, पोषण और टीन एजर लडकियों को लेकर रंजना ने किया संवाद. संवाद पर आधारित यह आलेख.

अंशा कपूर ने बड़े ही उत्साह से खेलो में हिस्सा लेना शुरू किया ,स्कूल की तरफ से एनसीसी के कैंप में भी चली गयी ,लेकिन वहां जाते ही उसे उल्टियां–चक्कर आने शुरू हो गये,अब क्या था कैंप में एक दिन भी रहना मुश्किल हुआ-घर वापस हो गयी|

नारायणी दसवीं में पढ़ती है| उसके दोस्तों में लड़कों की संख्या ही ज्यादा है, जिनके साथ सिगरेट और बियर पीना नार्मल है लेकिन घर में खाना बहुत सोच समझ कर खाती है|कहीं मोटी न हो जाऊं,आये दिन माँ –बाप को उसे लेकर डॉ. के पास भागना पड़ रहा है|


अनिका बैडमिंटन की अच्छी ख़िलाड़ी है ,खाने को लेकर बहुत चूजी भी, उसके माँ बाप परेशान है कि हर एक बात पर हाथो का नस काट कर तैयार हो जाती है|

प्रियंसी बहुत खुबसूरत भी है और स्लिम भी इसके लिए मेहनत  भी करती है| अभी बारहवीं का पेपर देने गयी और हॉल में ही चक्कर  खा कर गिर पड़ी,हॉस्पिटल ले जाना पड़ा,डॉ ने बताया कुपोषण के कारण ऐसा हुआ है| उसे खाना देख कर ही डर लगता था|

ये कुछ उदाहरण हैं, जिनसे इस उम्र की लड़कियों की स्वास्थ्य समस्या को समझा जा सकता है.
टीन ऐज लडकियां 
फिल्म  अभिनेत्री  की तरह  सुंदर  दिखने की चाहत इसी उम्र से शुरू हो जाती है| इसमें कोई बुराई भी नहीं है| जिंदगी का सबसे खुबसूरत और मदमस्त उम्र होता है यह ,उत्साह उमंग और मस्ती अपने सर्वोत्तम पड़ाव पर होता है| इस उम्र में हर कोई द बेस्ट बनना चाहता है| मुश्किल तब होगी शुरू हो जाती है जब खुबसूरत, स्लिम और सेक्सी दिखने की चाह में खाना –पीना कम करके दिन रात खुद को सवारने में लगी रहती है| उन्हें  नहीं समझ की खाना छोड़ने से चेहरे का ग्लो कम हो जायेगा| इसमें उनकी भी कोई गलती नहीं ,उम्र में जितनी समझ , वैसे दोस्त ऊपर से शारीरिक बदलाव.

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लेकिन इस उम्र की लडकियां जिस मानसिक और शारीरिक बदलाव से गुजर रही होती है ,उसका ध्यान रखना जरुरी है ,उनके भीतर हो रहे हार्मोनल परिवर्तन का असर पढाई के साथ साथ व्यवहार पर भी पड़ता है| इसका ध्यान रख कर ही समाज में बढ़ रही विकृतियों से बच सकते हैं.


व्यक्तित्व विश्लेषण, शिक्षा, फर्स्ट क्रश, डेटिंग ,सेक्स शिक्षा ,अपने ही शरीर में हो रहे ग्रोथ,आत्म सम्मान, माहवारी,और दोस्त. ये कुछ ऐसी बाते होती हैं जो हर टीन एजर फेस करती है| हमलोगों की सामाजिक संरचना में खुल कर बाते भी नहीं समझाई जाती है| नतीजतन गूगल और दोस्तों की संगत कुछ भी करवा लेती है|ऐसे में बहुत जरुरी होता है की उनका ध्यान पढाई के साथ साथ की अतिरिक्त गतिविधि में रहे,फिटनेश का पूरा ध्यान रखे ,संतुलित भोजन ले .

अक्सर लोग कहते है ,मासिक धर्म में ज्यादा काम न करो व्यायाम न करो ..लेकिन यह गलत सोच है ,बल्कि इन दिनों में व्यायाम जरुर करे ,इसके बहुत से फायेदे हैं. जैसे ---इस टाइम बॉडी फ्लैसिबल ज्यादा होता है, तो आप बॉडी शेप बहुत आसानी से बना सकती है दिन भर हाय –हाय दर्द के नाम पर मूड खराब करने से बेहतर है की व्यायाम करके ,हारमोंस को बैलेंस कर ले,इससे दर्द में आराम मिलेगा और मूड भी फ्रेश होगा | व्यायाम से इंडोर्फिन नामक हारमोंस संचालित होता है ,जो थकान और सिरदर्द से मुक्ति दिलाता है, हारमोंस के नियमित रहने से बहुत शारीरिक विकृतियों से बचा जा सकता है मासिक के समय सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा .
हो सकता है कई बार मासिक के समय व्यायाम करते वक्त बहाव ज्यादा हो,तो यह घबराने की बात नहीं बल्कि शरीर के लिए और सही है.मासिक में खाने में विशेष ध्यान रखना होगा ,दूध ,दही ,पनीर फल हर हाल में ले ,वरना एनेमिक भी हो सकती है. इस उम्र में विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षित होना भी स्वस्थ होने की ही निशानी है.पर यह सीख देना भी बहुत आवश्यक है की दोस्ती और उससे अधिक में कितना  अंतर है. देश का भविष्य स्वस्थ रखना है तो लडकियों को स्वस्थ रखना होगा.

फिटनेस का सम्बन्ध केवल शारीरिक व्यायाम से नही है. यह विषय काफी गूढ़तम विषय में से है जहाँ पर मानसिक और शारीरिक स्वास्थय जैसे हर पहलू पर ध्यान देना फिटनेस है. जिम में कठिन व्यायाम तथा वेट ट्रेनिंग से आप शारीरिक तौर पर सुडौल तो नज़र आ सकते है लेकिन इसके प्रतिकूल परिणामों पर हम कभी ध्यान नहीं देते जो आगे चलकर गंभीर बिमारी व चोट को जन्म देती है.


फिटनेस में ध्यान रखने वाली बातें:

क –फिटनेस  के  मूल आधार उत्तम खान-पान, श्वसन प्रक्रिया तथा सूक्ष्म व्यायाम, ये तीन आधार स्तम्भ हैं.

ख) सबसे पहले अपने शरीर को देखें, उसकी क्षमता को देखे फिर व्यायाम करना शुरू करे.

ग) फिटनेस  के प्रति जागरूक होना अच्छी बात है,लेकिन अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक या जो खुद के लिए उपयोगी न हो उसे भी करना ठीक नहीं है-दर्द को,शारीरिक तकलीफों को नज़र अंदाज़ करना भी उचित नहीं है

घ) व्यायाम रूटीन से करें, हमेशा कुछ रोचक तथा नयेपन के साथ करें तब मानसिक और शारीरिक दोनों का संतुलन बना रहता है. मसलन आप रनिंग करते हैं रोज, तो कभी-कभी जॉगिंग या तेज चाल के साथ कॉम्बो कर ले, व्यायाम के साथ डांस को भी शामिल कर लें ,इससे बोरियत नहीं होगी,और संतुलन भी बना रहेगा.

च) तन –मन को स्वस्थ रखने के लिए बॉडी को पूरी तरह रेस्ट और नींद मिलना बहुत जरुरी है ,कम से कम सप्ताह में एक दिन आराम करें,कोशिश करे की रिलेक्स मूड में रहें.

वैसे तो आजकल अपने फिगर को लेकर हर उम्र की महिलायें बड़े जतन करती रहती हैं  ,छोटी छोटी लड़कियां भी कैलोरी माप कर खाने लगी है, जिम में घंटो प्रैक्टिस करती रहती है ,फल –सब्जी से ज्यादा पाउडर सप्लीमेंट पर रहने की कोशिश करती है,ऐसे में खुद के साथ क्या बुरा कर रही है उन्हें नहीं पता. मूलतः फिटनेस के लिए जिम जाना और घंटो पागल की तरह लगे रहना कम उम्र लड़कियों के लिए सही नहीं है,जिम का हार्ड वर्क,कई बार मांसपेशियों को डैमेज कर देता है,किशोरावस्था में जिम की आदत से शारीरिक विकास भी रुक जाता है,कद भी छोटा रह सकता है,घुटने कमजोर हो जाते है. खाने पर कण्ट्रोल और जिम का भरी भरकम वर्कआउट से शरीर के विकास रुक जायेंगे. जिम की ओर रुख तब करें जब परिपक्व हो जायें, मसलन बीस से पच्चीस साल के बीच


  1.बच्चो के लिए हेवी वेट ट्रेनिंग कभी नहीं होना चाहिए /ग्यारह से बीस साल के बच्चो को खेलने की आदत           डाले,कुछ भी रनिंग ,साइक्लिंग ,तैराकी या फिर डांस /जिससे उन्हें आनंद भी आये और फिटनेस भी बनी          रहे   के प्रति अभ्यस्त करें.

  आप बच्चो को कुछ इस तरह भी करवा सकते है:

2. स्ट्रेंथ एक्सेरसाइज़, जिसमे अपने ही शरीर का प्रयोग होता है और मांसपेशियां, हड्डियां मजबूत होती हैं.

3.खानपान –फिटनेस का सीधा सम्बन्ध खानपान से है,बढती उम्र में शरीर को सभी तरह के मिनरल्स ,प्रोटीन,   वसा लेनी चाहिए ,ऐसा नहीं है की घी –मक्खन हमेशा नुकसानदायक है ,अति कुछ भी नुकसान करता है /बस  अल्कोहल ,ड्रग्स ,सिगरेट और जंक फ़ूड से दूरी बना कर रखें.

प्रस्तुति: रंजना, सम्पर्क:8802868068

तस्वीरें गूगल से साभार 

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