स्त्री की चेतना और संसार का कहानी संग्रह है शरद सिंह की किताब ’तीली-तीली आग’


डॉ.जीतेंद्र प्रताप 

कथाकार डॉ. शरद सिंह का कथा संग्रह तीली तीली आग मुझे जिन प्रमुख कारणों से आकर्षित और प्रभावित करता है,उन कारणों की संख्या महज एक या दो नहीं, कई है। तीली-तीली आग कथा संग्रह स्त्रियों के जीवन को रेखांकित करता कहानी संग्रह है। इसका प्रकाशन सन् 2003 में सामयिक प्रकाशन, दिल्ली से हुआ । गौरतलब है कि उक्त कथा संग्रह में लेखिका ने जिन सत्रह कहानियों को प्रस्तुत किया है उनमें  आये स्त्री  पात्रों के माध्यम से लेखिका ने समय और समाज के समानान्तर आ रहे स्त्री चेतना के बदलावों  को विस्तॄत एवं व्यापक फलक पर उतारने की कोशिश की है।

कथा संग्रह की प्रथम कहानी मरद की मुख्य स्त्री पात्र सुंदरा है। इस कहानी की शुरुआत ही कुछ इस तरह होती है,“सुंदरा शेरनी की तरह दहाड़ रही थी। अपनी साड़ी का छोर कमर पर कसे हुए वह खांटी बुंदेली गालियों की बौछार कर रही थी।” कहानी का यह प्रथम वाक्य ही यह बताने के लिए काफी है कि सुंदरा शेरनी बनी हुई थी। जरूर इसके पीछे कोई न कोई अनुचित और अमानवीय कारण रहा होगा, खासकर वर्तमान समाज के लिए। तभी तो उसे शेरनी का रूप धारण करना पडा था। जब हम कहानी में आगे बढ़ते हैं तो पाते हैं कि सुन्दरा जिन दो समस्याओं से विकट रूप से जूझ रही थी, वे थीं- उसकी बेटी पर जमींदार की कुदॄष्टि और उसकी तथा बेटी के शौच के लिए बाहर जाने की समस्या। इन दोनों समस्याओं से लड़ने वाली सुंदराबाई का जुझारू रूप यह साबित करता है कि आज की स्त्री  की सोच में व्यापक बदलाव आ रहा है। बस जरूरत है, समाज के प्रत्येक सदस्य उसके साथ कंधे से कंधा मिलाएं और मानवीय समाज की स्थापना में अपना योगदान दें।

तीली तीली आग इस कथा संग्रह की दूसरी कहानी है। इस कहानी की स्त्री पात्रों में मुख्य रूप से दो पात्र हैं- कहानी की वक्ता और प्रीतो। इन दोनों के बीच वैसे तो खून का कोई रिश्ता नहीं है ,फिर भी उनका आपसी रिश्ता खून के किसी भी रिश्ते से कहीं ज्यादा ही मज़बूत है। प्रीतो का प्रेम प्रसंग एक डाक्टर से चल रहा है। कहानी की वक्ता को यह भली भांति पता है कि यह गलत है फिर भी समय़ और समाज की मांग को देखते हुए उसने भी अपनी सोच में प्रगतिशील बदलाव किया। उसने प्रीतो की मुलाकत उस डाक्टर से कराने में अपना अमूल्य योगदान दिया, लेकिन साथ ही प्रीतो को शारीरिक संबंध न बनाने या फिर सुरक्षित तरीके से बनाने की हिदायत भी दे डालती है। इस घटना के द्वारा लेखिका ने स्त्री की आधुनिक विकसीत सोच को उजागर करने का प्रयास किया है।

तीसरी कहानी आठ गुना आठ सुख है ।इसमें स्त्री पात्र रामरती जो एक नौकरानी है,को यही लगता है कि आठ गुना आठ माप वाले बिस्तर पर सोने वाले लोग ज्यादा सुखी होते हैं। यह एक तरफ उसकी निर्दोषता और अबोधता को व्यक्त करता है तो दूसरी ओर नौकरों और मालिकों के बीच के आर्थिक अंतर की भयावहता को भी दर्शाता है। आठ गुना आठ सुख पाने की कामना रखने वाली रामरती यह भी सोचती है कि क्या नौकरों को एक टूटी खाट भी नसीब नहीं होनी चाहिये। यह विचार अमीरी-गरीबी के फांक को समझते हुए वर्ग चेतना का प्रथम बिंदु है।

चौथी कहानी पांच लड़कियां और उनके सपने है। इसमें पांचों लड़कियों को पैसा, चमचमाती कारें, सजीले नौजवान आदि ही लुभाते हैं। उनकी इस प्रकार की सोच से आख़िरी तौर पर सहमत नहीं हुआ जा सकता  कि पैसा कमाने के लिए देह व्यपार ही एकमात्र साधन रह गया है। क्या यह स्त्रियों की बदलती सोच पुरातन से विद्रोह है?

किस किस को कटवाओगे केशू कहानी में एक स्त्री पात्र हिम्मा के साथ बलात्कार की घटना सुनकर कहानी की वक्ता उससे पूर्ण सहानुभूति रखती है। वह इस घटना को चाह कर भी नहीं भूल पाती है। वह कहती है ,“बलात्कार हिम्मा के साथ हुआ था लेकिन उससे उत्पन्न मानसिक पीड़ा को मैं भी झेल रही हूं। ‘उसका यह कथन इस बात की ओर इशारा करता है कि आज एक महिला दूसरी महिला पर हो रहे अत्याचार और अन्याय को देखकर शांत रहने वाली नहीं है। आज जब किसी लडकी के साथ किसी भी शहर में बलात्कार या अन्य अमानवीय अत्याचार होता है तो स्त्रियों का हुज़ूम सडकों पर उतर आता है। यह सब होना कोई मामूली बात नहीं है। यह  चेतस होती स्त्री की ओर ही संकेत करता है।


घो घो रानी कित्ता पानी कहानी में लेखिका शरद सिंह ने बडी ही कुशलता के साथ यह स्पष्ट किया है कि आज कोई भी प्रेमी किसी भी स्त्री के लिए जान देने के लिए तैयार नहीं होता है।वह समय बीत गया जब ऐसी घटनाएं सुनाई देती थीं। आज यदि कोई कुंआरी लडकी मां बन जाती है तो उस बच्चे का कथित बाप भी उसे अपना नाम देने को शायद ही तैयार हो। ध्यातव्य है कि आज की स्त्रियां इस बात को बखूबी समझने लगी हैं। और उनकी यही सोच और समझ मुझे व्यक्तिगत आत्मिक सुकून प्रदान करती है।

सुअरबाड़े की जान्ह्वी कहानी में जान्ह्वी ने अपनी समझदारी और बुद्धिमत्त्ता से अपने वैवाहिक जीवन में आने वाली उन कठिनाइयों, जिन्हें शायद आसानी से हल न किया जा सके,को दूर कर सुखद वैवाहिक जीवन व्यतीत किया। हथियारों वाले कहानी में मुख्य स्त्री  पात्र चाची ने अपनी सूझ-बूझ से ससुर के समक्ष मुंह न खोलने की रूढिवादी और गैरज़रूरी परंपरा को तोड़ते हुए अपने परिवार में होने वाले खून खराबे तथा गांव में प्रस्तावित दंगे को रोक पाने में सफल रही थीं।

एक अदद प्यार के लिए कहानी की पात्र विपुला को अंत तक प्यार की परिभाषा को ही समझ पाने की उधेड़बुन में परेशान दिखाया गया है। अंतत: एक पल ऎसा भी आता है जब वह अपने प्यार का इज़हार करना तो चाहती है,पर उसे कोई ऐसा व्यक्ति ही नहीं मिलता जिससे प्यार किया जा सके। इसी तरह कथा संग्रह में गीला तौलिया,वो गंदले मुंह वाली,बही खाता आदि ऐसी कहानियां है, जिनमें अभिव्यक्त स्त्रियों की सोच और मानसिकता को सलाम करने का जी चाहता है।

इस तरह कथा संग्रह की अधिकतर कहानियां पुरुषसत्तात्मक समाज को चुनौती देती हुई प्रतीत होती हैं। इन कहानियों की स्त्री पात्र अपनी सोच और विचारों की गहनता की सार्थकता एवं सच्चाई को साबित करती हैं। इन कहानियों में पुरुष की अहंवादी सोच को भी बेनकाब किया गया है। यही नहीं स्त्री चरित्रों की भीतरी हलचल भी विस्तार से सामने आती है।
 ’तीली-तीली आग’ 
लेखिका – डॉ. शरद सिंह
सामयिक प्रकाशन, दिल्ली 

डॉ.जीतेंद्र प्रताप 
जवाहर नवोदय विद्यालय, मुडिपु, 574153
दक्षिण कन्नड़, कर्नाटक, मो.9739198095)

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