रेखा का खत अमिताभ बच्चन के नाम (!): काश, तुम्हारी जिंदगी लंबी के साथ बड़ी भी होती ?


आज तुम्हारा जन्मदिन है अमित
मुबारक हो

जीवन में कुछ इच्छाएं अधूरी रह जाएं, कुछ हसरतें पूरी न हो पाएं तो जीने की ललक बनी रहती है। हमने जो वक्त साथ बिताया उसे याद करती हूं तो आज के अमिताभ में उस पहले अमित को खोज नहीं पाती हूं। तुम हमेशा पॉलिटिकली करेक्ट बने रहे और मैं..मुझ पर से तुम्हारा नशा जब तक उतरा बहुत देर हो चुकी थी अमिताभ।



कल मेरा जन्मदिन था और आज तुम्हारा है। इस तरह नियति ने हमारा साथ सुनिश्चित किया। यह बात अलग है कि मेरे और तुम्हारे दोनों के जन्मदिन पर हमारा वह रिश्ता सुर्खियां बनता है जिसे तुम न तो कभी स्वीकार कर सके न नकार सके। सिलसिला फिल्म में आखिरी बार साथ में फिल्म किए हुए साढ़े तीन दशक बीत चुके हैं। लेकिन हमारा जिक्र एक साथ आज भी ऐसे आता है जैसे कल ही की बात हो।

तुम्हें तो याद भी नहीं होगा कि शुरुआती दौर में हमारे रिश्ते को अखबार किस तरह याद किया करते थे? वे कहते थे कि मोटी-काली और भद्दी रेखा पर अमिताभ का साथ मिलते ही निखार आ गया। यह किसी ने नहीं बताया कि यह कैसे होता है? मेरे नैसर्गिक साहस को तुम्हारे प्यार से जुड़ी बोल्डनेस करार दिया गया। मेरी अभिनय क्षमता को तुम्हारे नाम से जोड़कर उसे मेरी किस्मत का नाम दिया गया।


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आज चार दशक बाद भी हालात रत्ती भर भी नहीं बदले हैं। तुम्हें पता है आज एक वेबसाइट ने क्या लिखा है, 'अमिताभ पर अपने हुस्न का जादू चलवाने के लिए रेखा ने खुद को पूरी तरह बदल दिया था। बतौर अभिनेत्री पहली हिंदी फिल्म 'सावन भादो' में मोटी सी दिखने वाली रेखा, अमिताभ से प्यार के बाद काफी बोल्ड दिखने लगी थीं। '

क्या यह सबकुछ तुम्हारी वजह से था अमित? मेरी दशकों की खुद्दारी, मेरी मेहनत का श्रेय मैं किसी और को नहीं लेने दूंगी। इतने दशकों तक यह अपमान-बदनामी और व्यंग्यात्मक सवालिया निगाहों का सामना करती हुई अपना वजूद कायम रखने में कामयाब रही तो केवल और केवल अपनी वजह से। मैं इस पत्र के माध्यम से ऐसा सोच रखने वाले हर शख्स को बताना चाहती हूं कि सन 1972 में जब मैंने 18 वर्ष की उम्र में मुंबई में अपना पहला फ्लैट खरीदा था तब तक मैं तुमसे मिली भी नहीं थी। वह दिन है और आज का दिन है। रेखा ने जो भी हासिल किया अपनी मेहनत और काबिलियत से।

मैंने चार शादियां की, मैं तुम्हारे नाम का सिंदूर लगाती हूं, मेरे पति ने आत्महत्या कर ली क्योंकि मैंने कभी उसे पति का दर्जा नहीं दिया। हर कोई जानता है कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं लेकिन चटखारे लेने का मौका कोई क्यों गंवाएगा?

रिश्ते में तो हम दोनों थे अमिताभ! फिर हमेशा मुझे ही विलेन के तौर पर क्यों पेश किया गया? क्या मैं तुम्हारा घर तोड़ रही थी? क्या यह एकतरफा रिश्ता था? मैंने कभी तुम्हारे बारे में कहा था कि एक गुलाब हमेशा गुलाब ही रहता है उसे चाहे किसी भी नाम से पुकारो। मुझे तुम्हारी ईमानदारी, सत्यनिष्ठ पर नाज था लेकिन 2004 में एक साक्षात्कार में यह कहकर तुमने मुझे बहुत बड़ा झटका दिया था कि मैं तुम्हारी सिर्फ सह-कलाकार रही। यह भी कि मेरा तुम्हारा कभी इसके अलावा कोई रिश्ता नहीं रहा।

     सावधान ! यहाँ बुर्के में लिपस्टिक भी है और जन्नत के लिप्स का आनंद लेती उषा की अधेड़ जवानी भी
   


तुम जानते हो हमारे रिश्ते से मेरी कोई उम्मीद जुड़ी नहीं थी। मुझे बस तुम्हारा साथ अच्छा लगता था। वह भी कुछ ही दिन का था। जैसा कि मैंने ऊपर कहा मेरे जीवन में तुम प्रेम की तरह आये लेकिन एक बुरे ग्रह की तरह तुम्हारा साया मेरे जीवन की हर अच्छी बुरी बात पर पड़ गया।  वह कहावत तो सुनी ही होगी तुमने कि आदमी की जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए। बढ़ती उम्र के साथ तुम्हारा कद लगातार छोटा होता जा रहा है अमिताभ। क्या तुम्हें इस बात का अहसास है? आज तुम्हारा 75वां जन्मदिन है  ईश्वर से मैं  यह कामना करना चाहती हूं कि तुम्हें जिंदगी में थोड़ी खुद्दारी अता फरमाए।

(अमिताभ के नाम रेखा का वह खत जो कभी लिखा ही नहीं गया)
यह काल्पनिक खत पत्रकार पूजा सिंह ने लिखा है. पूजा अपने स्त्रीवादी तेवर और हस्तक्षेप करती रपटों के लिए जानी जाती हैं. 


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