बहुजन परंपरा की ये किताबें पढ़ें

डेस्क 

स्त्रीकाल की अनुषंगी संस्था 'द मार्जिनलाइज्ड पब्लिकेशन ' की आगामी किताबों की अग्रिम बुकिंग शुरू है. आगामी तीन से चार सप्ताह में आने वाली किताबों के लिए अग्रिम बुकिंग 'पहले आओ पहले पाओ की नीति' के तहत विशेष छूट के साथ शुरू की जा रही है. किसी एक किताब (पेपर बैक) की खरीद पर पायें 35% की विशेष छूट और दो किताबों पर 40% की. हार्ड बाउंड किताबों पर  45% की छूट दी जायेगी. बुकिंग ऑनलाइन या अकाउंट ट्रांसफर के जरिये की जा सकती है.


     ACOOUNT NAME: THE MARGINALISED
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1.               सावित्रीबाई फुले रचना समग्र :
                  संपादक: रजनीतिलक, मराठी से अनुवाद: शेखर पवार

         

यह किताब 19वीं सदी की उस युगनायिका के लेखन का समग्र संकलन है, जिसे आधुनिक भारत में स्त्री शिक्षा की मशाल जलाने का श्रेय जाता है. पुस्तक में संकलित सावित्रीबाई फुले की रचनायें, उनके विचार पाठकों के विचारोन्मेष के लिए जितने उपयोगी हैं, उतना ही इतिहास, साहित्य और समाजशास्त्र के शोधार्थियों के लिए भी.

मूल्य:  अजिल्द: 160 रूपये
            सजिल्द: 350 रूपये



2. चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु ग्रन्थावली (चार खण्डों में प्रकाशित)
   संपादक : कँवल भारती 




डा. भीमराव अम्बेडकर (बाबा साहेब) के जीवन और कार्यों से उत्तर भारत को परिचित कराने वाले चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु  और कँवल भारती द्वारा संपादित उनकी ग्रंथावाली पर चिंतक/ साहित्यकार प्रेमकुमार मणि की टिप्पणी:
बोधानन्द और अछूतानंद की वैचारिकता को चन्द्रिकाप्रसाद जिज्ञासु ने  आगे बढ़ाया और इस पूरे संघर्ष को एक व्यवस्थित गति दी . यह चुनौती पूर्ण कार्य था . लखनऊ के सआदतगंज में उन्होंने एक प्रेस और प्रकाशन की स्थापना की . प्रकाशन का नाम था बहुजन कल्याण प्रकाशन और प्रेस का नाम समाज सेवा प्रेस .  उन्होंने स्वयं बोधानन्द और अछूतानंद की जीवनियां लिखी और प्रकाशित की . बाबासाहेब का जीवन संघर्ष उनकी लिखी ऐसी महत्वपूर्ण कृति है ,जिसे पढ़कर हिंदी भाषी भारत के लोग आंबेडकर के जीवन और कृतित्व से परिचित हुए . आंबेडकर की अनेक पुस्तकों के अनुवाद और प्रकाशन का श्रेय जिज्ञासु जी को जाता है . हिंदी भाषी इलाके को उन्होंने आंबेडकर  से परिचित कराया . लेकिन इतना ही कहना शायद उनके महत्त्व को सीमित करना होगा  .  उन्होंने एक मन्त्र दिया कि दलित और पिछड़ी जातियों को एक साथ आये बिना ब्राह्मणवाद से निर्णायक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती . मार्क्सवाद ,गांधीवाद ,लोहियावाद और अन्य दूसरे समाजवादी संघर्षों से चुपचाप अलग रहते हुए उन्होंने मनोयोग पूर्वक फुले -अम्बेडकरवाद की ज़मीन उत्तरभारत में तैयार की

इतने महत्त्व पूर्ण लेखक -विचारक की रचनावली उपलब्ध नहीं थी . उन्ही की परम्परा के योद्धा लेखक कँवल भारती ने जिज्ञासु जी की रचनावली परिश्रम पूर्वक सम्पादित कर ऐतिहासिक महत्त्व का कार्य किया है . यह रचनावली बहुजनों के समग्र संघर्ष को बल तो प्रदान करेगी ही ,एक नए आधुनिक भारत का स्वरूप भी निर्धारित करेगी ,जो अधिक लोकतान्त्रिक और न्यायपूर्ण होगा .

मूल्य:  अजिल्द: 450 रूपये ( चौथे खंड का मूल्य 250 रूपये)
            सजिल्द: 900 रूपये ( चौथे खंड का मूल्य 500 रूपये)
नोट:   पूरा सेट खरीदने पर ( 1000 रूपये में अजिल्द और 1900 रूपये में सजिल्द उपलब्ध है)

3. भारत के राजनेता: अली अनवर 
  संपादक : राजीव सुमन 
  श्रृंखला संपादक : प्रमोद रंजन 





यह किताब एक खास उद्देश्य से एक सुनिश्चित श्रृंखला के तहत प्रकाशित की जा रही किताबों का हिस्सा है. ‘भारत के राजनेता’ सीरीज के तहत प्रकाशित किताबों का उद्देश्य है कि लोग यह समझें कि जिन विचारों, जिन मुद्दों के लिए वे अपने नेता को चुनकर विभिन्न सदनों में भेजते हैं, जिन्हें अपने हितों के लिए जनादेश देते हैं वे क्या और कितना उनकी उम्मीदों पर खरे उतरते हैं. चुने हुए प्रतिनिधि अपनी जनता की समस्याओं, उनके दुःख-दर्द  और अपने क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं के साथ-ही-साथ राज्य और देश के विकास में कितने मुखर रूप से और प्रभावी ढंग से संसद के या विधान सभा के पटल पर रख पाते हैं. सदनों के पटल पर उनका हर कार्य-व्यवहार उनकी बोली और भाषा उनके भाषण, मुद्दे उठाने और उनके जुझारूपन का सीधा संबंध उन सबकी सामूहिक चेतना और उत्तरदायित्व से जुड़ता है और उसी का प्रतिबिम्बन माना जा सकता है, जिनकी और जिस क्षेत्र की वे नुमाइंदगी कर रहे होते हैं. संसदीय या विधानसभा की कार्यवाहियों में उनकी सक्रीय भागीदारी और हिस्सेदारी उनका व्यक्तिगत मसला नहीं होता. वे कितनी सिद्दत और कितनी सहजता से अपने लोगों, अपने क्षेत्र की समस्याओं को आवाज दे पाने में सफल होते हैं उससे उनकी नियत की झलक मिलती है.

यह किताब भारत में ‘पसमांदा आन्दोलन के सूत्रधार राज्यसभा में दो बार चुने हुए प्रतिनिधि ‘अली अनवर’ की संसदीय सहभागिता और समाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर उनकी पहलों को केन्द्रित है.  इस किताब के संपादन में ऐसी रूपरेखा और सम्पादन के क्रम में ऐसे मानक तय किये जो विश्वसनीय हों और जिसके द्वारा तय हो सके कि जनता का वोट जाया नहीं गया. हम संसद के दोनों सदनों और या विधानसभाओं में विभिन्न मसलों पर उनके वक्तव्यों, उनके दर्ज भाषणों और उनके हस्तक्षेपों के साथ-साथ स्पेशल मेंशन, शून्य काल, और तारांकित प्रश्नों-उत्तरों के माध्यम से उनके कंसर्न को देखने समझने की कोशिश कर रहे हैं. इन सबके अलावा एक लंबा साक्षात्कार भी इस पुस्तक में शामिल किया गया है जिससे उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि से लेकर उनके सामाजिक राजनैतिक और आर्थिक पृष्ठभूमि को समझने में मदद मिल सके.  यह किताब आधुनिक भारत के समाज शास्त्र, राजनीति विज्ञान और इतिहास के शोधार्थियों तथा राजनीति और अपने जन प्रतिनिधि को समझने के लिए आम जन के लिए उपयोगी है.

 मूल्य:  अजिल्द: 200 रूपये
            सजिल्द: 400 रूपये


4. प्रसाद काव्य-कोश 
    संपादक : कमलेश वर्मा 
               सुचिता वर्मा 



 
हिन्दी कविता के शिखर कवि जयशंकर प्रसाद का यह काव्य-कोश हिन्दी के पाठकों शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण पुस्तक है.

 मूल्य:  सजिल्द: 950 रूपये

अग्रिम बुकिंग




संपर्क: द मार्जिनलाइज्ड पब्लिकेशन
           इग्नू रोड, नेबी सराय, दिल्ली, 68
           रजिस्टर्ड कार्यालय: सनेवाड़ी, वर्धा, महाराष्ट्र-1
            ईमेल: themarginalisedpublication@gmail.com, फोन: 9650164016, 8130284314


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