सेक्सिस्ट बयानों और ट्रोलिंग के खिलाफ आगे आये लेखक: जारी किया वक्तव्य


वक्तव्य / Statement

हिन्दी जगत में साहित्यिक पुरस्कारों पर विवाद कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ समय से भारतभूषण अग्रवाल कविता पुरस्कार (जो 35 वर्ष से कम अायु के कवि द्वारा लिखी गई वर्ष की सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कविता के लिए दिया जाता है) विवाद के केन्द्र में रहा है अौर कविता के चयन पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। लेकिन सोशल मीडिया अौर दूसरे मंचों पर कुछ पुरुष लेखकों ने, जिनमें युवा और प्रौढ़ दोनों तरह के लोग हैं, जिस भद्दे और अाक्रामक स्त्री-विरोधी रवैये और अश्लील भाषा का प्रदर्शन किया है, उससे हम स्तब्ध हैं। दुःख की बात यह है कि इनमें से अनेक लोग अपने को लोकतांत्रिक, उदारमना और कुछ तो वाम रुझान वाला मानते हैं।

पिछले साल पुरस्कार के लिए चयनित कवि शुभमश्री और उनकी कविता पर अशोभनीय अौर अपमानजनक ढंग से हमले किये गये थे। इस वर्ष अश्लील हमले का निशाना चयनकर्ता अनामिका को बनाया गया है। हमें डर है कि इससे एक ऐसी अस्वस्थ परम्परा की नींव पड़ रही है जिसके तहत हर तरह के स्त्रीद्वेषी, मर्दवादी विमर्श, सामन्ती मानसिकता के खुले प्रदर्शन और साहित्य जगत में लफ़ंगेपन को वैधता मिलेगी। दूसरी तरफ़ इसी समय अति-दक्षिणपंथी विचारों के नैतिक-प्रहरी और ट्रॉल भी सक्रिय हैं जो अपनी ज़हरीली भाषा के साथ, छद्मवेश में तरह तरह के भ्रम और दुष्प्रचार फैलाने, और चरित्रहनन करने में मशग़ूल हैं।


हम सभी लेखकों और साहित्यप्रेमियों की चिंताओं के भागीदार हैं जो इस वस्तुस्थिति से परेशान हैं, और उन लेखकों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं जिन्हें हाल ही में असभ्य और प्रतिक्रियावादी हमलों का निशाना बनाया गया है। समकालीन हिन्दी साहित्य सांस्कृतिक गुंडों, उनके भटके हुए अनुयायियों और प्रच्छन्न क़िस्म के फ़ासीवादी दस्तों के लिए कोई खुला मैदान नहीं है।
शुभा
प्रशांत चक्रवर्ती
मंगलेश डबराल
मनमोहन
दूधनाथ सिंह
नरेश सक्सेना
असद ज़ैदी
राजेश जोशी
अली जावेद
अमिताभ
अनीता वर्मा
अपर्णा अनेकवर्णा
अरुण माहेश्वरी
चंदन पांडेय
चमनलाल
देश निर्मोही
धीरेश सैनी
जवरीमल पारख
किरण शाहीन
कुलदीप कुमार
कुमार अंबुज
कुमार विक्रम
लाल्टू
लीना मल्होत्रा
महरुद्दीन ख़ाँ
महेश वर्मा
मुकुल सरल
निर्मला गर्ग
नूर ज़हीर
पल्लव
पंकज चतुर्वेदी
पंकज श्रीवास्तव
प्रत्यक्षा
अार चेतनक्रांति
रंजीत वर्मा
रवीन्द्र त्रिपाठी
संजीव कुमार
समर्थ वशिष्ठ
सरला माहेश्वरी
शालिनी जोशी
सुमन केशरी
शिवप्रसाद जोशी
शीबा असलम फ़हमी
शेफ़ाली फ़्रॉस्ट
सुषमा नैथानी
तरुण भारतीय
त्रिभुवन
वंदना राग
विनोद दास
वीरेन्द्र यादव
संजीव चंदन
निवेदिता
नासिरुद्दीन
फारूक शाह
रेखा सेठी
पूजा पाठक
रमेश ऋतंभर
डा. सुनीता
गुलज़ार हुसैन
हेमलता माहिश्वर
हेमलता यादव
अनिता भारती
श्वेता यादव
अरुण कुमार
मृदुला शुक्ला
कविता
इंद्र मणि उपाध्याय
इश्वर शून्य
राजेश चंद्र
जितेन्द्र श्रीवास्तव
स्मिता सिन्हा
रश्मि  भारद्वाज
चरण सिंह पथिक
संदीप मील
रितुपर्ना मुद्राराक्षस
कमलेश वर्मा
कैलास वानखेड़े
आशीष अनचिन्हार
आभा दुबे
विजेंद्र मसीजीवी
प्रमोद धीताल
राजेश राज
संजीवनी पी संजीवनी
कुसुम राय
राजीव कार्तिकेय
दीपक मिश्रा
सीमा आज़ाद
रणजीत कुमार सिन्हा
एम नय्यर उमर
भरत प्रसाद
अरुणाभ सौरभ
अशोक पाण्डेय
रुचि भल्ला
रेशमा प्रसाद
रेखा चमोली
मंजू शर्मा
मनीषा जैन
मनीषा कुमारी
राजीव सुमन
नवनीत पांडेय
जीवेश प्रभाकर
जीतेंद्र विसारिया

STATEMENT

“Events like announcement of a literary award often cause a stir in Hindi literary circles. Lately the Bharatbhooshan Agrawal Award (given for the best Hindi poem of the year written by a poet from the age group under 35) has been the focus of controversy, provoking a variety of reactions questioning the validity of the decision. We are especially distressed at the ugly display of aggressive misogyny and intemperate language from a number of men, young and old, in social media and print journalism, some of them profess to be liberal, democratic, and few of them like to call themselves left-leaning.

“Last year the awarded poem and its author, Shubham Shree, were the target of a barrage of derogatory and abusive attacks. Interestingly, this year it was the turn of the selector, Anamika, who is facing scurrilous attacks. This sets an unhealthy precedent whereby the openly sexist discourse, assertion of feudal mindset and lumpenisation of literary universe is being given legitimacy. In addition, the literary vigilante of ultra right persuasion are contributing their own bit in poisoning the atmosphere by generating a miasma of confusion, character assassination, impersonation, fakery and vile speech.

“We share our concern with all the writers and readers who have been dismayed at these developments, and express our solidarity with the writers who have been targets of these uncivil and reactionary assaults. The domain of contemporary Hindi literature is not yet ready to be taken over by the cultural brutes, their misguided followers and crypto-fascist militias.”
Shubha
Prasanta Chakravarty
Mangalesh Dabral
Manmohan
Doodhnath Singh
Naresh Saxena
Asad Zaidi
Rajesh Joshi
Ali Javed
Amitabh
Anita Verma
Aparna Anekvarna
Arun Maheshwari
Chaman Lal
Chandan Pandey
Desh Nirmohi
Dheeresh Saini
Jawari Mal Parakh
Kiran Shaheen
Kuldeep Kumar
Kumar Ambuj
Kumar Vikram
Laltu
Leena Malhotra
Maheruddin Khan
Mahesh Verma
Mukul Saral
Nirmala Garg
Noor Zaheer
Pallav
Pankaj Chaturvedi
Pankaj Srivastava
Pratyaksha
R Chetankranti
Ranjeet Verma
Ravindra Tripathi
Samartha Vashishtha
Sanjeev Kumar
Sarla Maheshwari
Shalini Joshi
Sheeba Aslam Fehmi
Shephali Frost
Shivprasad Joshi
Suman Keshri
Sushma Naithani
Tarun Bhartiya
Tribhuvan
Vandana Rag
Vinod Das
Virendra Yadav
Sanjeev Chandan
Nivedita
Nasiruddin
Faruk shah
Rekha Sethi
Pooja Pathak
Ramesh Ritambhar
Dr. Sunita
Gulzar Hussain
Hemlata Maihshwar
Hemlata Yadav
anita Bharti
Shweta Yadav
Arun Kumar
Mridula Shukla
Kavita
Indra Mani Upadhyay
Ishwar Shunya
Rajesh Chandra
Jitendra Shrivastav
Smita Sinha
Charan Singh Pathik
Sandeep Meel
Rituparna Mudrarakshas
Kamlesh Verma
Kailash Vankhede
Ashish Anchinhar
Abha Dubey
Vijendra Masijiwee
Pramod Dhital
Rajesh Raj
Sanjeevani P Sanjeevani
Kusum Rai
Rajeev Karteekey
Deepak Mishra
Sima Azad
Ranjeet Kumar Sinha
M. Nayyar Umar
Bharat Prasad
Arunabh Saurabh
Ashok Pandey
Roochi Bhalla
Reshma Prasad
Rekha Chamoli
Manju Sharma
Manisha Jain
Manisha Kumari
Rajeev Suman
Navneet Pandey
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