जाने उन पांच महिलाओं को और उनकी कहानी जो तीन तलाक को रद्द कराने में सफल हुईं


शायरा बानो उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं. 2002 में उन्होंने इलाहाबाद के रिजवान अहमद से शादी की. उनके दो बच्चे भी हैं. शायरा के मुताबिक उनके ससुराल में उन्हें बहुत प्रताड़ित किया जाता था. उनसे दहेज की मांग की जाती, मारा-पीटा जाता. इन सबके चलते वो बीमार भी रहने लगीं. इसके बाद रिजवान ने शायरा को जबरदस्ती काशीपुर वापस अपने पिता के घर भेज दिया. साल 2015 में उनके पति ने उन्हें डाक के जरिए तलाक भेज कर रिश्ता खत्म कर लिया. तलाक को चुनौती देते हुए वे सुप्रीम कोर्ट पहुंची.


10 अक्टूबर 2015 को पति ने शायरा के पास रजिस्ट्री से तीन तलाक का फरमान भेज दिया. शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की. बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन कानून 1937 की धारा 2 की संवैधानिकता को चुनौती दी.

कोर्ट में दाखिल याचिका में शायरा ने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं के हाथ बंधे होते हैं और उन पर तलाक की तलवार लटकती रहती है. वहीं पति के पास निर्विवाद रूप से अधिकार होते हैं. यह भेदभाव और असमानता एकतरफा तीन बार तलाक के तौर पर सामने आती है. शायरा कहती हैं, शादी के तुरंत बाद ही ससुराल वालों ने एक चार पहिया तथा ज्याैदा पैसों की मांग शुरू कर दी, लेकिन सिर्फ वही एक समस्याप नहीं थी. शुरुआत से ही, मेरे शौहर मेरी हर गलती पर मुझे तलाक की धमकी देते.


शादी के पहले दो साल तक जब मुझे बच्चा नहीं हुआ तो मेरी सास ने उनपर मुझे तलाक देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. शायरा अब एक 14 साल के लड़के और 12 साल की लड़की की मां हैं, दोनों की कस्टाडी उनके शौहर के पास है. शायरा कहती हैं कि रिजवान से शादी के एक साल बाद, उन्हेंल इलाहाबाद में अपनी बहन की शादी में जाने नहीं दिया गया. पिछले 14 सालों में, उन्हें् अपनी बहन के घर जाने की इजाजत नहीं मिली जोकि उनके इलाहाबाद वाले घर से सिर्फ आधे घंटे की दूरी पर रहती हैं.

शायरा कहती हैं मैं रिजवान (पति) से 6 या 7 बार अपनी नसंबदी कराने के लिए गिड़गिड़ाती मगर उन्होंने मुझे कभी ऐसा नहीं करने दिया. उनकी मां फिरोजा बेगम कहती हैं कि भावनात्मनक और शारीरिक पीड़ा ने शायरा को जड़ बना दिया है. पिछले साल से पहले, उनकी बेटी ने कभी अपना दर्द बयां नहीं किया था, तब भी नहीं जब रिजवान ने उनका गला दबाने की कोशिश की थी. फिरोजा कहती हैं कि दिमाग खराब हो गया था शायरा का टेंशन ले ले कर. यहां आकर हमने इलाज कराया.


पिछले साल अप्रैल में जब शायरा की तबियत बिगड़ी तो उनके मुताबिक रिजवान ने उनसे एक छोटा बैग पैक करने को कहा. रिजवान ने शायरा के पिता को उन दोनों से मुरादाबाद के रास्ते  में कहीं मिलने को बुलाया, जहां से वे शायरा को घर ले जा सकते. शायरा से कहा गया था कि वह पूरी तरह ठीक होने के बाद ही घर लौट सकती है. शायरा कहती हैं, 'जब मेरी हालत में सुधार हुआ, तो मैं उन्हेंे फोन करती और कहती कि मुझे वापस ले जाओ. लेकिन वह मुझे वापस नहीं आने देना चाहते थे और मेरे बच्चों  से बात करने भी नहीं देते थे.  शायरा ने बेचैनी से छह महीने तक इंतजार किया और फिर तलाक-नामा आ गया..

याचिका में सऊदी, पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों में तीन तलाक पर प्रतिबंध का भी जिक्र किया  और कहा गया  कि भारत जैसे प्रगतिशील देश में इन चीजों की कोई जरूरत नहीं है.


आफरीन रहमान
जयपुर की 25 वर्षीय आफरीन रहमान ने भी तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्हें  इंदौर में रहने वाले उनके पति ने स्पीड पोस्ट के जरिए तलाक दिया था। आफरीन ने कोर्ट से न्याय की मांग की थी। आफरीन का आरोप था कि उनके पति समेत ससुराल पक्ष के दूसरे लोगों ने मिलकर दहेज की मांग को लेकर उनके साथ काफी मारपीट की और फिर उन्हें घर से निकाल दिया।


अतिया साबरी
यूपी के सहारनपुर की आतिया साबरी के पति ने कागज पर तीन तलाक लिखकर आतिया से अपना रिश्ता तोड़ लिया था। उनकी शादी 2012 में हुई थी। उनकी दो बेटियां भी हैं। अतिया ने आरोप लगाया था कि लगातार दो बेटियां होने से नाराज उनके शौहर और ससुर उन्हें घर से निकालना चाहते थे। उन्हें दहेज के लिए भी परेशान किया जाता था।


गुलशन परवीन 
यूपी के ही रामपुर में रहने वाली गुलशन परवीन को उनके पति ने 10 रुपये के स्टांप पेपर पर तलाकनामा भेज दिया था। गुलशन की 2013 में शादी हुई थी और उनका दो साल का बेटा भी है।


इशरत जहां
तीन  तलाक को संवैधानिकता को चुनौती देने वालों में पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत जहां भी शामिल थीं। इशरत ने अपनी याचिका में कहा था कि उसके पति ने दुबई से ही उन्हें फोन पर तलाक दे दिया। इशरत ने कोर्ट को बताया था कि उसका निकाह 2001 में हुआ था और उसके बच्चे भी हैं जिन्हें पति ने जबरन अपने पास रख लिया है। याचिका में बच्चों को वापस दिलाने और उसे पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि ट्रिपल तलाक गैरकानूनी है और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन है

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