गरीबी जिसके लिए बाधा नहीं : किरण ठाकरे

एक घरेलू कामगार माँ की बेटी किरण ठाकरे में नेतृत्व की व्यापक संभावनाएं हैं. वे अपने जीवन का पहला चुनाव भी नागपुर महानगरपालिका के लिए लड़ रही हैं. ओबीसी जाति से आने वाली किरण के संघर्षों और उनके राजनीतिक स्वप्न को हम सझते हैं विक्रम कुमार से  स्त्रीकाल में महिला-नेतृत्व सीरीज के तहत. 

21 तारीख को नागपुर महानगरपालिका का चुनाव होने जा रहा है, जहाँ एक तरफ आरएसएस-बीजेपी सहित सभी बड़ी पार्टियां धन-बल के साथ चुनाव में उतरेगी वहीँ दूसरी तरफ 23 वर्षीय किरण ठाकरे धन-बल और साम्प्रदायिकता की राजनीति को ख़ारिज करने के लिए नागपुर महानगरपालिका का चुनाव लड़ रहीं हैं, मतदाताओं से ही चंदा लेकर. किरण ठाकरे समाज में बदलाव के लिए संघर्षरत है और इस बदलाव में उनका परिवार भी उनके साथ है, जबकि उनकी पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं है, एक कमरे का घर है, जिसमे मां, पिता, छोटी बहन निशा ठाकरे और खुद किरण भी रहती हैं.

किरण ठाकरे के घर उनका हौसला आफजाई करने पहुँची एनएफआईडवल्यू की राष्ट्रीय महासचिव 

दलित महिलाओं के संघर्ष की मशाल: मंजुला प्रदीप 

 2009 में एक दुखद घटना घटी, उनकी छोटी बहन योगिता ठाकरे (किरण ठाकरे की छोटी बहन) की संदेहास्पद मौत हो गई और इनकी लाश वर्तमान में केन्द्रीय मंत्री सह बीजेपी के बड़े नेता नितिन गडकरी के कार में मिली. योगिता ठाकरे के मृत शरीर पर 17 जख्म के निशान थे और मुंह, नाक से खून बह रहा था, तब से किरण ने आपनी बहन के साथ-साथ औरों को भी इंसाफ दिलाने की लड़ाई शुरू कर दी. किरण की मां गाँव में ही बरतन मांझने का काम करती है, जिससे इनका घर चलता है, इतनी कठिन परिस्थिति में होने के बावजूद इन्होंने हार नहीं माना और एक मोर्चा खोल दिया आरएसएस और बीजेपी के खिलाफ|.आज ये आरएसएस-बीजेपी के गढ में नितिन गडकरी को चुनौती देने के लिए तैयार हैं, उनके घर के इलाके से आम आदमी शहर विकास मंच के तरफ से नागपुर महानगरपालिका का चुनाव लड़ रही हैं|  एक तरफ धनबल दूसरी तरफ जनता से चन्दा लेकर किरण चुनाव लड़ रही हैं, अबतक अधिकांश घरों में इन्होने संपर्क पूरा कर लिया है.

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किरण ने अपनी पढाई नागपुर के सरकारी स्कूलों से की है- मैट्रिक, इंटर (कला) करने के बाद इन्होंने आगे की  पढ़ाई के लिए नागपुर विश्वविद्यालय में स्नातक (राजनीति विज्ञान) में दाखिला लिया और अपनी पढ़ाई को जरी रखा है|  किरण बताती हैं कि उन्के  गाँव में सरकार द्वारा संचालित स्कूलों  को बंद करा दिया गया है और जो शिक्षक थे उनको कोई दूसरा काम दे दिया गया है ताकि वे स्कूल में पढ़ा ना पायें. किरण का मानना है कि ‘शिक्षा का निजीकरण और व्यापारीकरण नहीं होना चाहिए नहीं तो गरीब, किसान-मजदूर के बच्चे पढ़ नहीं पाएंगे, शिक्षा सबको बिना किसी भेद-भाव के सामान रूप से मिलनी चाहिए. इस समाज में बदलाव लाने के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरुरी है, इसीलिए इन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी है.’

मतदाताओं से मिलती किरण 

मार्क्सवादी विचारधारा ने किरण को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, जिससे कि आन्दोलन तथा इसकी जमीन तैयार करने में उन्हें बहुत सहायता मिली उन्होंने नागपुर में मजदूर आंदोलनों में कई बार हिस्सा लिया और नेतृत्व भी किया. इस तरह के आंदोलनों में रहने से राजनीतिक समझ और भी प्रगाढ हो जाती है. किरण कहती हैं कि “राजनीति में अधिकांशतः जिनके पास धन और बल है या जो विशेष परिवार से ताल्लुक रखते हैं, वही लोग राजनीति कर रहे है, जिसका मकसद जनता को लूटना है और यही सब देख कर लोग कहते है कि राजनीति गन्दी होती है.”


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किरण ने मार्क्स, लेनिन और भगत सिंह को पढ़ा है. आंदोलनों के अनुभव से उनकी अपनी एक समझदारी बनी, जो वे आपनी बातों में रखती भी हैं. उन्होंने कहा कि “राजनीति गन्दी नहीं होती है बल्कि कुछ लोगों कि गन्दी हरकतों के कारण ऐसालगने लगती है,” उनका मानना है कि सबको राजनीति करनी चाहिए और जबतक गरीब मजदूर महिलाएं राजनीति नहीं करेंगे, तबतक वे अपने हक़ को नहीं ले पाएंगे. ऐसे में किरण का नागपुर महानगरपालिका का चुनाव लड़ना यह दिखाता है कि अब वे  दिन नहीं रहे जब  सर्वहारा वर्ग सिर्फ नेता चुनेगा अब नेता बनने का दिन आ गया है.  इनकी लड़ाई बराबरी की लड़ाई है, जो कि पूंजीवाद और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ है, जिससे न सिर्फ समाज को नुकसान है, बल्कि समाज का अस्तित्व भी खतरे में आ जाता है.
किरण जहाँ से चुनाव लड़ रही हैं,  वहां उन्होंने कई सारे मुद्दों पर काम किया है.  मुख्य रूप से महिलाओं पर जिस तरह से हमले हो रहे हैं, उनके सवाल बुलंदी के साथ उठाया है और वे खुद भी अपनी छोटी बहन के न्याय के लिए लड़ रहीं हैं, जिसकी हत्या कर दी गई थी. इन्होंने नागपुर में महिलों को एक हिम्मत देने का काम किया है और आरएसएस के खिलाफ आमने-सामने मैदान में हैं.जाति हमारे समाज की सच्चाई है जिससे होकर दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों को गुजरना पड़ता है, किरण और इनकी मां ने भी इसका सामना किया, किरण की मां जहाँ काम करने ब्राह्मणों के घर में जाती हैं, तो उन्हें जाति के नाम पर प्रताड़ित किया जाता रहा है.  ये कोई एक घर की बात नहीं है, ऐसा सभी ब्राह्मणों के घरों में होता है. सभी लड़ाइयों के साथ-साथ यह भी एक लड़ाई है और परिवार ने हिम्मत रखा और लड़ा. किरण कहती हैं कि “ये जो अमीरी और गरीबी के मध्य जो शोषण की खाई है उसे ख़त्म होना चाहिए, नहीं तो इस पूंजीवादी व्यवस्था में अमीर और अमीर होता जा रहा है तथा गरीब और गरीब होते जा रहा है- अगर इसी तरह से चलता रहा तो शोषण का रूप और भी भयानक होगा फिर इंसानियत खतरे में आ जायेगी.” किरण के बुलंद इरादों के लिए एक अच्छी बात यह रही है कि उन्हें जनता के मुद्दों के लिए हमेशा संघर्षरत जम्मू आंनद का मार्गदर्शन मिला.  पिछले सात-आठ सालों से उनका राजनीतिक प्रशिक्षण जम्मू आनंद के साथ जनता के सवालों पर संघर्ष करते हुए हुआ. बुलंद इरादों वाली इस लडकी की हौसला आफजाई के लिए पिछले 10 फरवरी को एनएफआईडवल्यू की राष्ट्रीय महासचिव एनी राजा उनसे मिलने उनके घर पहुँचीनी और  चुनावी लड़ाई के लिए उन्हें शुभकामनायें दी.


समाज में जब भी आम लोगों का शोषण होगा शोषित अपनी आवाज बुलंद करेंगे और शोषण के कारोबार को ध्वस्त करेंगे. किरण विकास के वर्तमान मॉडल को झूठी मानती हैं, “जहाँ ऊँची ईमारत बना देना, पुल बना देना, बांध बना देना ही विकास के तौर पर दिखाया जाता है. ये सब एक छलावा है,  इस तरह के विकास का फायदा आम आदमी को नहीं होता. देश की आम जनता खुश नहीं है , उसे जिंदगी को बचने के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है.” किरण के अनुसार, “विकास वह होगा, जिसमें सबको शिक्षा, आवास, रोजगार, खाना और सबको समान रूप से न्याय दिया जायेगा.”

बुलंद इरादे और युवा सोच के साथ 

 किरण जिस सोच के साथ आगे बढ़ रही हैं, इससे कहीं न कहीं लगता है कि बदलाव हो रहा है और जब समाज में कुछ बदलने की हलचल होती है तब लोग सचेत अवस्था में आते हैं, किरण ने यही किया है, समाज में लोगों को सचेत करने की कोशिश शुरू की है और यह जरुरी है कि आम जनता को सोच कर तय करना पड़ेगा कि क्या सही हो रहा है और क्या गलत हो रहा है, यह तय होना भी बदलाव है.

विक्रम छात्र संगठन AISF से जुड़े है
संपर्क : 9013778733

दलित स्त्रीवाद मेरा कमराजाति के प्रश्न पर कबीर

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