पूर्ण शराबबंदी के लिए प्रतिबद्ध वड़ार समाज की बेटी संगीता पवार


नितिन राउत 

'स्त्री नेतृत्व की खोज’ श्रृंखला के तहत नितिन राउत परिचित करा रहे हैं संगीता पवार से. घूमंतू जनजाति वड़ार समुदाय से आने वाली संगीता महाराष्ट्र में पूर्ण शराबबंदी के लिए प्रतिबद्ध हैं. 


संगीता पवार पूरे महाराष्ट्र को शराब मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्हें यह भी पता है कि यह आसान जंग नहीं है, लेकिन जिस दौर से वे गुजरी हैं, उसने इसके लिए उन्हें प्रतिबद्ध किया है, और उनके प्रयास शायद रंग भी लेकर आयें, असर पैदा कर भी रहे हैं.

संगीता का जन्म यवतमाल के पिछड़े  इलाके में 1981 में हुआ. वड़ार समुदाय ( नोमैडिक ट्राइव) से आने वाले उनके पिता फौज में नौकरी करते थे. फौज से सेवानिवृत्ति के बाद उनके पिता ने ठेकेदारी शुरू की. इसी दौरान उनको शराब की लत लगी. शराब पीकर घर आना और छोटी-छोटी बात पर परिवार को मारना पीटना- रोज का रूटीन बन गया. उन जख्मों  को कुरदते हुए संगीता बताती हैं, ‘पापा घर आते तो दहशत का माहौल छा जाता था. कभी खाने की थाली दीवारें सजाती थी तो कभी मम्मी का शरीर. पापा जब घर से निकलते तब हम सभी एक दूसरे के आगोश में रात भर रोया करते’. संगीता ने  मेडिकल लेबोरेट्री एंड टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा किया है.


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पिता का शराब से देहांत

शराब कि बढती लत ने पिता की जान ले ली .इस सदमे में  माता का मानसिक संतुलन बिगड गया. छोटा भाई शराबी हुआ. पूरे मोहल्ले का यही हाल था. इसलिये बाकी जिंदगी शराब मुक्ति के जंग को ही समर्पित करने की ठान ली संगीता ने. प्रयास मोहल्ले से शुरु हुआ. उन्होंने शराब से पीडित महिलाओं को संगठित किया- उनमें आंदोलन की चेतना जगाई .


सरकारी देसी- विदेशी दुकानों से जंग

सरकारी देसी दुकान और विदेशी शराब दुकान के चलते शराबबंदी संभव नही थी. इस समस्या को जड से हटाना जरुरी था. इसके लिए उन्होने ग्रामीण क्षेत्र की  महिलाओ को संगठित किया. गाँव  परिसर में अवैध तरीके से चलने वाले हाथ भट्टी पर धावा बोला . सैकड़ो  महिलाओ को लेकर यवतमाल जिले के रुई गाँव की पहली हाथ भट्टी उन्होने बंद कराई . बहुजन शोषित समाज संघर्ष समिति स्थापित की गई. अब एक गाँव से दूसरे गाँव में अवैध तरीके से शुरू शराब को बंद करने का सिलसिला शुरू हुआ .



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 ठेकेदारों का संगीता पर हमला

कई गावों की महिलायें संगीता के कार्य में उनका साथ देने लगीं. संगीता जिस हाथ भट्टी पर धावा बोलती,  वहां के  शराब ठेकेदार अपना बोरिया-बिस्तर लेकर रफा- दफा हो जाते. संगीता का दारू अड्डों पर खौफ बढते जा रहा था. परिणामतः उनके दुश्मनों की तादाद भी बढ रही थी. एक गाँव में शराब बंद करने के बाद संगीता और उनके साथी घर लौट रहे थे,  तब उनपर हमला भी हुआ. हाथ में तलवार लेकर लोगों से लैस एक 'सुमो गाडी' ने उनका पीछा किया. संगीता बताती हैं कि बचने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी. लेकिन हिम्मत जुटाते हुए उन्होंने चुनौती दी, 'आज अगर तुम हमे मारोगे तो कल मेरी बहनें  तुम्हारे साथ तुम्हारे परिवार को जिंदा जला देंगी'. इनका क्रोध और हिम्मत देखकर गुंडे वहाँ से गायब हो गये . ऐसे हमलों और धमकी के फोन की उन्हें आदत पड चुकी है. खोखले धमकियों से वे नही डरती हैं

 व्यसन मुक्ति आंदोलन की शुरुआत 

यवतमाल जिले के पास का अर्जुन नगर शाराबियों का अड्डा बन चुका था. मोहल्ले में 50 साल पुराना सरकारी देसी शराब अड्डा था. संगीता अर्जुन नगर की महिलाओं से मिलने उनके घर पहुँची. शराब के चलते बेहद दुखी महिलाओं ने अपना  दुखडा संगीता को सुनाया. अर्जुन नगर में शराब बंदी को लेकर जिलाधिकारी को उन्होंने ज्ञापन सौपा. शराब दुकान हटाने के लिये वहां मतदान करवाया गया. 'उभी बाटली आडवी बाटली' (खड़ी बोतल की पड़ी बोतल) बैनर के अंतर्गत यह चुनाव हुआ.  इसमें  50 फीसदी मतदान 'आडवी बाटली' के पक्ष में गया. 50 साल पुरानी  सरकारी शराब की दुकान बंद हो गई. अब लोकशाही मार्ग से शराब की दुकाने बंद कराई गई. शुरू में उनके द्वारा स्थापित 'बहुजन शोषित समाज संघर्ष' अब 'व्यसन मुक्ति आंदोलन' मे परवर्तित हो चुका था. लाखो  महिलायें मोर्चा मे संगीता का साथ देती दिखाई देती.

 20 अप्रैल 2015 का यवतमाल जिला शराब बंदी का मोर्चा आज भी उनके रोंगटे खडे कर देता है. यवतमाळ शराब बंद मोर्चे की संगीता ने गुहार लगाई. मोर्चे की तारीख तय हुई . सुबह का समय था,  जब 50 महिलायें मोर्चे में  दिखाई दे रही थीं. उनका विश्वास टूट रहा था. जैसे -जैसे समय बीतता गया, वैसे -वैसे यवतमाल की  सडकों पर जनसैलाब उमड रहा था . 50 हजार महिलायें  मोर्चा में  सहभागी हुई. चार दिन मे मुख्यमंत्री के साथ बैठक और दारूबंदी पर विचार किया जायेगा, ऐसा आश्वासन प्रशासन ने उसे दिया .  

 पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे के मतदारसंघ की शराबबंदी

आंदोलन अब शहर तक सीमित नही रहा. विभिन्न जिले में  शराबबंदी कि चिनगारी भडकणे लगी थी. पूर्व रेवेन्यू मंत्री एकनाथ खडसे के मतदार संघ में कुऱ्हा काकोडा गाँव में शराब की नदिया बहती थीं. तीन देसी शराब के और 1 देसी- विदेशी शराब की दुकान, वहां  सराकर के आशीर्वाद से चलाई जा रही थी . मंत्री के मतदार संघ में शराबबंदी का जंग आसान नहीं था.  शराब दुकानों के पक्ष में  खुद एकनाथ खडसे सामने आये . लेकिन विरोध मे पूरी  जनता ने संगीता का साथ दिया  'उभी बाटली आडवी बाटली'  बैनर  के अंतर्गत चुनाव हुआ,  ज्यादातर वोट 'आडवी बाटली' के पक्ष में  पडे . हाय कोर्ट के निर्देश से चारो दुकानो को सील लगाया गया . 'व्यसन मुक्ति आंदोलन समिति;  ने अबतक सैकड़ो  शराब दुकानो को बंद कराया है.

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आंदोलन के चलते हायवे पर शराबबंदी

शराब मुक्त महाराष्ट्र की  मांग को लेकर 15 हजार महिलाओं के  साथ चक्का जाम आंदोलन किया गया . इस मार्ग से गुजर रहे केंद्रीय विधी विभाग के सचिव को घेरा गया . महाराष्ट्र शराब बंदी और हायवे पर हो रही दुर्घटना के चलते हायवे पर 'वाईन शॉप' दुकानें  बंद कराने का ज्ञापन सौपा गया था. पत्र व्यवहार किया गया. और हायवे पर शराब की  दुकानें हटाये जाने का निर्णय हुआ.


महिला मुद्दों की पहचान 

अब पूरे महाराष्ट्र में शराबबंदी के लिए संकल्पबद्ध संगीता कहती हैं कि 'पूर्ण दारूबंदी, आर्थिक सबलता, उद्यमिता आदि महिला आंदोलनों का मुख्य मुद्दा होना चाहिए. महिलाओं की समाज, परिवार ,अर्थ और शासन में 50% भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए.' संगीता के अनुसार यह सब हासिल करने के लिए पुरुषों का साथ जरूरी है.

नितिन राउत महाराष्ट्र में पत्रकारिता करते हैं. विभिन पत्र-पत्रिकाओं के साथ-साथ इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नियमित काम के बाद आजकल फ्रीलांस पत्रकारिता कर रहे हैं. संपर्क: 9767777917
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