बलात्कारी के खिलाफ छात्र

मुकेश कुमार  

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोध छात्रा के साथ भाकपा-माले के छात्र संगठन आइसा के नेता अनमोल रतन द्वारा बलात्कार मामले के खिलाफ तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने  भागलपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर प्रतिमा स्थल–स्टेशन चौंक पर प्रतिवाद-प्रदर्शन किया एवं दिल्ली पुलिस, जेएनयू के कुलपति और भाकपा माले के महासचिव का पुतला फूंका. इस मौके पर प्रदर्शनकारी छात्र बलात्कार के आरोपी छात्र नेता को जेएनयू से निलंबित करने एवं विवि परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे. छात्रों के समूह ने दिल्ली पुलिस द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी में ढिलाई बरतने और पीड़ित छात्रा की पहचान को सार्वजनिक करने पर भी तीखा आक्रोश व्यक्त किया. छात्र बलात्कारी को स्पीडी ट्रायल चलाकर सख्त सजा देने की मांग बुलंद कर रहे थे. ज्ञात हो कि 20 अगस्त को अपने कमरे पर ले जाकर शोध छात्रा को नशीला पदार्थ खिलाकर उक्त आइसा नेता ने इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया था.



प्रदर्शनकारी छात्र नेता अंजनी ने भागलपुर स्टेशन चौंक पर आयोजित प्रतिरोध सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश के बौद्धिक केंद्र कहे जाने वाले जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय में एक शोधछात्रा का छात्र नेता बलात्कार करता है और उसकी गिरफ्तारी और कठोरतम सजा दिलाने के लिए तत्काल कोई आंदोलन नहीं होता है. गंभीर सवाल तो यह है कि इस घिनौनी हरकत को कोई और नहीं स्त्रियों की ‘बेखौफ आजादी’ और ‘दिल्ली गैंग रेप’ के खिलाफ हुए आंदोलन की अगुवाई करने वाले संगठन से जुड़ा प्रमुख नेता करता है. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि ऐसी घृणित व्यक्ति ऐसे संगठन का नेता कैसे बना दिया गया. और उस पर जब यह मामला सामने आया तो बलात्कारी छात्र नेता को महज संगठन से निकालने और पीड़िता के पक्ष में एकजुटता का बयान जारी कर चुप्पी साध ली जाती है. ऐसे मामले सामने आने पर तो बुर्जआ पार्टियां भी इतना करती हैं, तब उनमें और इनमें क्या फर्क रह गया. भाकपा-माले का कोई बड़ा नेता अन्य मामलों की भांति इस मामले पर बोलना तक जरूरी नहीं समझते ! उन्होंने कहा कि इससे माले नेताओं की पितृसत्तात्मक सोच खुलकर उजागर होती है.


जेएनयू जैसे कैंपस के पितृसत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ने और स्त्री-पुरुष समानता की बात करने वाले ज़्यादातर वामपंथी संगठनों ने भी आइसा द्वारा जारी बयान को ही पर्याप्त कार्रवाई मान लिया और अपनी ओर से भी इसी किस्म का बयान जारी कर मामले को चलता करने की कोशिश की. सोशल साइट से लेकर पूरे देश में जब उनकी थू-थू होने लगी तब जाकर घटना के पाँच दिन बाद पुलिस मुख्यालय के समक्ष जैसे-तैसे प्रदर्शन की खानापूर्ति की है.  वहीं छात्र नेता सुमन कुमार और संजीव कुमार ने कहा कि इस पूरे मामले पर जेएनयू के कुलपति ने अब तक जिस किस्म की निष्क्रियता दिखाई है, वह अत्यंत ही शर्मनाक है. विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बलात्कारी छात्रनेता को न तो जेएनयू से निलंबित किया गया और न ही विवि परिसर में उसके घुसने पर ही कोई प्रतिबंध लगाया गया. ऐसे गंभीर मसले पर कोई कार्रवाई नहीं करना कुलपति की स्त्रीविरोधी मानसिकता को ही उजागर करता है. ऐसे व्यक्ति को कुलपति के पद पर बने रहना पूरे छात्र समुदाय और स्त्रियों के लिए अपमानजनक है. दोनों छात्र नेताओं ने ऐसे व्यक्ति को कुलपति पद से अविलंब हटाने की मांग की.



जबकि छात्र नेता दीपक कुमार एवं राजेश यादव ने कहा कि जिस तरह दिल्ली पुलिस ने पीड़िता की पहचान सार्वजनिक कर आपराधिक काम किया है, ऐसे पुलिस पदाधिकारी को अविलंब बर्खास्त करते हुए उनपर मुकदमा दर्ज कर स्पीडी ट्रायल चलाकर सजा की गारंटी की जाय. दोनों छात्र नेताओं ने कहा कि जिस प्रकार दिल्ली पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी में सुस्ती बारात रही थी, ठीक वैसे ही जेएनयू छात्र संघ, आइसा और भाकपा-माले भी सड़क पर उतारने में सुस्त दिखे. इस मामले में दिल्ली पुलिस, जेएनयू विवि प्रशासन के साथ ही आइसा और भाकपा-माले की सक्रियता व संवेदनशीलता सवालों के घेरे में है. ऐसी मानसिकता के साथ ये फ़ासिज़्म से लड़ने के बजाय उसे मजबूत ही करेंगे.  इस मौके पर अंजनी, डॉ. अजीत कुमार सोनू, विकास, राजेश, विकास, जितेंद्र, कृष्ण बिहारी गर्ग, प्रियतम, सचिन, इमरान, पुष्पेश, असीम, अभिषेक सहित दर्जनों छात्र मौजूद थे.

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