पाकिस्तानी इस्लाम ने ली कंदील की जान

आशीष कुमार ‘‘अंशु’
आशीष कुमार ‘‘अंशु’ देश भर में खूब घूमते हैं और खूब रपटें लिखते हैं . फिलहाल विकास पत्रिका 'सोपान' से सम्बद्ध हैं और विभिन पत्र -पत्रिकाओं में लिखते हैं . संपर्क : 9868419453 .
‘‘एक महिला होने के नाते हमें अपने लिए जरूर खड़ा होना चाहिए, एक महिला होने के नाते हमें जरूर एक दूसरे के लिए खड़ा होना चाहिए, एक महिला होने के नाते हमें जरूर न्याय के साथ खड़ा होना चाहिए. मैं विश्वास करती हूं कि मैं आज के समय की फेमिनिस्ट हूं. मैं बराबरी में यकीन करती हूं. मुझे यह चुनने की जरूरत नहीं है कि मुझे किस तरह की औरत होना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि समाज के लिए मुझे किसी तरह के लेबल की जरूरत है. मैं सिर्फ आजाद ख्याल और आजाद सोच वाली एक महिला हूं और मैं जैसी भी हूं, मुझे अपने इस होने से प्यार है.’’

16 जुलाई को दोपहर लगभग एक बजे किया गया कंदील बलोच  का यह ट्वीट कंदील का एक परिचय भी है. 17 जुलाई को अपनी बहन की हत्या के आरोप में कंदील  के भाई मोहम्मद वसीम की गिरफ्तारी हो गई है. वसीम ने मान लिया कि उसने अपनी बहन की हत्या की और उसे इस हत्या के बाद कोई पछतावा नहीं है. इस पछतावा ना होने को सम्मान के नाम पर हत्या से जोड़ कर दुनिया भर की मीडिया देख रही है लेकिन यहां सम्मान से अधिक बड़ा सवाल इस्लाम का था.

सेकुलर अफ्रीकन नाम की एक वेवसाइट इस्लाम के संबंध में लिखती है- इस्लाम में सेक्स मजदूर की अवधारणा पर कोई विवाद नहीं है और यह इस्लाम में तब तक रहेगा जब तक मानवता रहेगी. इस्लाम रहेगा. महिलाओं के साथ सेक्स मजदूर रखने में भी भेदभाव है. मतलब इस्लाम पुरुषों को तो सेक्स के लिए महिलाओं को खरीदने-बेचने की इजाजत देता है, लेकिन महिलाओं को यह अधिकार नहीं है. इसी प्रकार 72 हूरों की कल्पना इस्लाम में है लेकिन यदि कोई पुरुषों की तरह अल्लाह का राज अर्थात दारूल इस्लाम की स्थापना की राह में अपनी जान दे दे तो क्या उसे 72 पुरुष उपलब्ध होंगे ? क्या वह 72 नहीं तो 36 पुरुषों को अपने लिए उपलब्ध पायेंगी ?

जिन्हें लगता है कि कंदील बलोच ऑनर कीलिंग की शिकार हुई है, उन्हें पाकिस्तानी मीडिया की पुरानी रिपोर्टिंग और कवरेज देखनी चाहिए. किस तरह महिला हो या पुरुष एंकर, वह कंदील बलोच को कैमरे के सामने जलील करने की कोशिश करता था. पाकिस्तान का आवाम भी उसे पसंद नहीं करता था. कंदील के इंटरव्यू में बार-बार आवाम का जिक्र आ ही जाता था. पाकिस्तान के लोग कंदील को पसंद नहीं करते थे और कंदील भी उन्हें पसंद नहीं करती थी. फिर भी सोशल मीडिया की यह शहजादी वहां हमेशा चर्चा में रहीं. हत्या से कुछ समय पहले दिए अपने एक साक्षात्कार में कंदील ने कहा था कि मैंने अभी कुछ नहीं किया. अब मैं पाकिस्तान के आवाम को दिखाऊंगी की मैं क्या कर सकती हूं ?

भारत और पाकिस्तान के बीच के अंतर को हाल में भूपेन्द्र चौबे  के उस साक्षात्कार के हवाले से समझा जा सकता है, जिसमें उन्होंने पोर्न स्टार  शनि लियोन से कुछ व्यक्तिगत सवाल पूछने की अभद्रता की. उसके बाद हर तरफ भूपेन्द्र चौबे  नाम के उस पत्रकार की आलोचना हुई। दूसरी तरफ जिस तरह बार-बार कंदील बलोच को पाकिस्तानी चैनलों पर जलील किया जा रहा था. वहां इसके विरोध में कोई आवाज सुनने को नहीं मिली. वास्तव में कंदिल सिर्फ अपने भाई मोहम्मद वसीम के लिए आॅनर का सवाल नहीं थी बल्कि कंदील पूरे पाकिस्तान के आॅनर की गर्दन पर लटकती तलवार बन गई थी। जबकि इस संबंध में इस्लाम कहता है- ‘जब तुममे हया ना रहे फिर तुम जो चाहे वह करो.’


अब जब पूरा पाकिस्तान कथित तौर पर कंदील बलोच  को बेहया मान चुका था फिर बार-बार उसके रास्ते में अंड़ंगा क्यों लगा रहा था ? इसकी बड़ी वजह यही रही होगी कि खुदा को मानने वालों की खुदा ने जो कहा है, उसे मानने में रूचि नहीं रही होगी. कंदील बलोच ने अपने साक्षात्कारों में बार-बार यह बात कही है कि मुझे खराब करने वाली आवाम है. बलूच ने यह भी कहा है- ‘बुराई तो अभी स्टार्ट हुई है. आगे देखिए मैं आवाम के साथ क्या करती हूं?’ पाकिस्तान के पत्रकारों के संबंध में कंदील ने एक साक्षात्कार में कहा था कि ये ठरकी लोग हैं. वैसे ठरकी तो वे मुफ्ती भी निकले जो ईद के चांद से पहले कंदिल का दीदार करना चाहते थे.

रोजे हयात समिति वाले मुफ्ती अब्दुल कबी के साथ पाकिस्तान के एक खबरिया चैनल पर कंदील मौजूद थीं. मुफ्ती के सामने कंदील ने कहा कि इन्होंने मुझसे पूछा था, तुम्हारा रोजा तो नहीं है. उसके बाद मुफ्ती ने कहा कि तुम्हारे नाम पर आज मैने अल्लाह से माफी मांग ली है और उसके बाद उन्होंने कंदील की जूठी सिगरेट और जूठा कोक पीया. जब यह पूरा प्रकरण पाकिस्तान की मीडिया में उछला उसके बाद कंदील अपनी हत्या की आशंका जता चुकी थी. कंदील के अनुसार मुफ्ती उसका हाथ अपनी अठारहवीं बेगम के तौर पर मांगने आए थे.गौरतलब है कि मुफ्ती की उम्र कंदील के पिता की उम्र के बराबर है.


कंदील  बलोच को पाकिस्तान भर से हत्या और जान से मारने की धमकी लगातार मिल रही थी, लेकिन उसे क्या पता था कि उसे खतरा बाहर वालों से नहीं है. उसका हत्यारा उसके घर में बैठा उसका भाई निकलेगा.  पाकिस्तान में एक अनुमान के अनुसार, प्रत्येक वर्ष 500 से अधिक महिलाओं की जान इस तरह के झूठे ‘सम्मान’ के नाम पर जाती है. कंदील बलोच के फेसबुक पोस्ट और ट्यूटर पोस्ट इस बात की गवाही है कि वह पाकिस्तानी आवाम की रूढिवादी कट्टर इस्लामिक सोच को बदलना चाहती थी. लेकिन न इस्लाम बदला, न पाकिस्तान बदला और ना निजाम बदला. वैसे खबरों पर यकीन करें तो कंदील बलोच का हत्यारा इस्लाम नहीं है, पाकिस्तान नहीं है. वह झूठे सम्मान की बलि चढ़ गई. बहरहाल, सच तो यही है कि कल तक कंदील को सिर्फ पाकिस्तान की आवाम जानती थी. आज उसे पूरी दुनिया जानती है। कंदिल बलोच होना आसान नहीं है. 
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