बहुत खूब कंगना राणावत, सलमान खान कुछ सीखो

मनीषा कुमारी 


कंगना राणावत ने गोरा बनाने के क्रीम को नस्लभेदी दायरे में रखते हुए ऐसे विज्ञापन करने से मना कर दिया. इस निर्णय से कंगना को लाखों का नुकसान जरूर हुआ, लेकिन विज्ञापन के गोरखधंधे में लगे फ़िल्मी हस्तियों के सामने कंगना ने एक सवाल तो जरूर उछाल दिया. जान अब्राहम , ऐश्वर्या राय , शाहिद कपूर , दीपिका पादुकोण , शाहरूख खान जैसे कितने फिल्म अभिनेता हैं , जो गोरा रंग बनाने के गोरखधंधे के विज्ञापन में उतर चुके हैं. जनता के नायक बने इन फ़िल्मी हस्तियों की जन सरोकारों से दूरी जगजाहिर है . अभी हाल में स्त्रीकाल में सलमान खान के द्वारा महिलाओं के खिलाफ हिंसक विज्ञापन किये जाने का मुद्दा उठाया था मनीषा कुमारी ने . आज फिर से स्त्रीकाल के पाठकों के लिए . 

सलमान की सजा , जमानत और अश्लील विज्ञापनों के बहाने 

सलमान खान को सजा हुई , जमानत मिल गई . सजा और जमानत के बीच फिल्म दुनिया और सोशल मीडिया में  सलमान की सजा के खिलाफ विलाप करने वालों की कोई कमी नहीं है . गायक अभिजित के बयान इस मायालोक की बदमिजाजी का एक नमूना भर है , जिसके लिए हर व्यक्ति , हर वस्तु हर भावना एक उत्पाद मात्र है , जो उन्हें अकूत संपत्ति बनाने के माध्यम भर हैं .





हमारा इरादा सलमान की सजा और मिली जमानत पर यहाँ गुण दोष की विवेचना का नहीं है , बल्कि भगवान बनाये जाने वाले इन महानुभावों के उस असर पर ध्यान दिलाने का है , जो हमारे आस- पास पुरुषवादी और वर्चस्ववादी दुनिया के निर्माण में मदद करता है , स्त्री को एक वस्तु –यौन आनंद की वस्तु बनाने में सहायक होता है . बिग बॉस जैसे रियलिटी शो के दौरान सलमान के अश्लील वक्तव्यों को यदि हम खुलेपन का एक अंग मान भी लें तो भी दूरदर्शन और अन्य चैनलों पर चलने वाले एस्ट्राल  पाइप के विज्ञापन को स्त्री के खिलाफ यौन हिंसा को उकसाने वाला विज्ञापन न मानें तो क्या मानें !

क्या सलमान खान जैसे लोग , जिन्हें एक बड़ा वर्ग भगवान् की तरह पूजता है , जिनका युवा पीढी का अधिकाँश अनुकरण करना चाहता है , इतने निर्दोष होते हैं कि जिन बातों को वे अपनी फिल्मों , छोटी फिल्मों या विज्ञापन से कहना चाहते हैं , जिनके लिए वे एक ख़ास भाव भंगिमा तैयार करते हैं , उनके प्रभावों से मुक्त होते हैं !एस्ट्राल पाइप का विज्ञापन एक हिंसक इरादे को मजाकिया अंदाज में कहते हुए स्पष्ट सन्देश देता है , जिसे देखते हुए कोई भी लडकी असहज हो जायेगी , लेकिन विज्ञापन की लडकी सलमान के इशारों और द्विअर्थी संवाद पर मुस्कुराती है – सब समझ लेने और उसे आनंद और लज्जा के मिश्रित रेस्पोंस देने के भाव में . निर्भया काण्ड में वीभत्स हमलों को हम सब ने जाना सुना है , जिसकी कल्पना मात्र से हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं , लेकिन सलमान और विज्ञापन के निर्माताओं को इन वीभत्स कारनामों के भीतर एक रोमांच सा अनुभव होता है . वे पाइप के विज्ञापन में एक युवा लडकी को क्या सन्देश देना चाहते हैं , उसे आप देखकर खुद समझ  सकते हैं . यौन हिंसा के द्विअर्थी संवादों और इशारों के लिए क्यों नहीं इस विज्ञापन से जुड़े लोगों के खिलाफ एक एफ आई आर की जानी चाहिए और इस विज्ञापन को बंद कर देना चाहिए ?

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विज्ञापनों में अक्सर स्त्री की प्रस्तुति यौन आनंद की वस्तु, पुरुष की सुख –सुविधा के लिए त्याग और समर्पण की देवी अथवा बिना दिमाग और सोच –समझ के कामांध के रूप में होती है. सारे डीयोड्रेन्ट के विज्ञापन ऐसी  ही कामांध स्त्रियों की छवि पेश करते हैं , जो एक कृत्रिम गंध के आकर्षण में अपना दिमागी संतुलन खोकर भी खुद को एक पुरुष के लिए सौप देती हैं .

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एयरटेल का एक विज्ञापन कई मायनों में स्त्रीविरोधी सन्देश देता है , पहला तो यह कि ऑफिस और घर में दोहरी भूमिका के कारण औरत ऑफिस में मर्दों की तुलना में कम काम करती है, दूसरा कामकाजी पुरुष-स्त्री के बीच घर के काम की जिम्मेवारी औरत की ही है , चाहे वह ऑफिस में अपने पति का बॉस ही क्यों न हो ! और बढिया खाना बनाकर औरत अपने पति को अपने लिए हासिल कर सकती है .




एयरटेल का विज्ञापन लिंक : यहाँ क्लिक करें 

‘ विज्ञापनों में स्त्री की छवि’  एक मुकम्मल शोध की मांग करती है और ऐसे शोध हो भी रहे हैं. अभी तो मैं सलमान की सजा से मायूसी और आक्रामकता के भाव से भरे लोगों के दृश्यों पर दुखी हूँ . भारतीय जेलों में लाखो लोग बिना दोषी सिद्ध हुए सड़ रहे हैं , उनमें ज्यादातार गरीब , दलित और अल्पसंख्यक हैं. कई तो जमानत राशि या जमानतदार की व्यवस्था न कर पाने के कारण जेलों में बंद रहने को विवश है. और हम हैं कि एक फर्जी मसीहा की सजा से दुखी हुए जा रहे हैं. पिछले कई दिनों से जब –जब मैं एस्ट्राल का विज्ञापन देखती थी तो इस कुंठा से भर जाती थी कि क्यों मैं सलमान की फ़िल्में देखकर अपने किशोर होते उम्र में एक भावुकता से भर जाती थी , यह तो सिर्फ और सिर्फ अकूत संपत्ति और शोहरत हासिल करने का सनकी व्यक्तित्व भर है , जिसके लिए एक स्त्री के अस्तित्व की कोई कीमत नहीं है .


स्त्री के खिलाफ यौन हिंसा के  संकेत से भर देने वाले इस विज्ञापन के लिए भी सलमान और पूरी टीम को सजा होनी चाहिए. लेकिन वोट बैंक लुभाने के लिए सलमान के साथ ‘पतंगबाजी’  का आंनद लेने वाले राजनीतिक चरित्रों में क्या यह साहस हो सकता है कि कडी कारवाईयों से वह एक स्पष्ट सन्देश ऐसे धंधेबाजों को दे , जिनमें इस माया लोंक के अधिकांश नायक शामिल हैं , हाँ सदी के महानायक भी..... !

मनीषा मनोविज्ञान की अध्येता हैं , सम्पर्क : manishamishra559@gmail.com
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