नरेन्द्र मोदी से नहीं मिलना चाहती है कलावती

संजीव चन्दन

कलावती बांदुरकर अब भूमिहीन मजदूर नहीं रही, उसके पास भी अब ठेके पर ली गई छः  एकड़ खेती है . अपने खेत में काम करती हुई अब वह मजदूरों की कमी की समस्या से जूझ रही है. वह भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नहीं मिलना चाहती है . वह स्पष्ट करती है कि ‘ पहले नरेन्द्र मोदी खेती –किसानी के लिए कुछ ठोस करें तो मैं उनसे मिलना पसंद करूंगी. उन्होंने बड़े –बड़े वायदे किये हैं , उन्हें पूरा करें.’ कलावती राहुल गांधी की चुनाव में पराजय को उनकी अलोकप्रियता से अलग करके देखती है . वह मोदी से मिलने की किसी इच्छा से इनकार करते हुए राहुल गांधी की प्रशंसा करती है कि ‘उन्होंने गरीबों के लिए बहुत किया है. उनकी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी से कई औरतों को विधवा होने से बचाया है .’ राहुल और कांग्रेस की हार पर अफ़सोस जाहिर करते हुए कहती है, ‘ पहले बी पी एल कार्ड पर २० किलो राशन मिलता था , अब मोदी के राज में 12- 13 किलो मिलता है.’

कलावती 


नरेन्द्र मोदी ने उडाया था कलावती का मजाक 
2013 में नरेन्द्र मोदी ने फिक्की के एक आयोजन में कलावती का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि “गुजरात में जस्सू बेन जैसी आदिवासी स्त्री है , जिसका लिज्जत पापड़ आज ब्रान्ड है, वह कलावती की तरह नहीं है .’ ठेके पर ली गई  अपने कपास की खेत में काम करती हुई कलावती नरेन्द्र मोदी की तरह उनका मजाक तो नहीं बनाती है लेकिन किसानों के लिए किये गए अपने वायदे पूरे करने के लिए उन्हें ललकारती है , ‘  राहुल गांधी और उनकी सरकार ने गरीबों के लिए काफी काम किये हैं, योजनायें चलाई हैं , मोदी भी किसानों के लिए कुछ ठोस करें .’ यह पूछे जाने पर कि वे फिर भी हार गए , वह विश्वास के साथ कहती है कि वे दुबारा आयेंगे . ‘मैं यह नहीं कह सकती कि कब, लेकिन वे प्रधानमंत्री जरूर बनेंगे और तब मैं अपने बच्चों की नौकरी के लिए उनसे मिलाने जाउंगी , उन्होंने वायदा किया था .’

झोपडी की जगह पक्के ईटों का घर 


कौन है कलावती बांदुरकर 
किसान आत्महत्या ग्रस्त विदर्भ के यवतमाल जिले के जालका गाँव की किसान –विधवा और 8 बच्चों की माँ ( 2 साल पहले ही मर गए थे , यानी 10 बच्चों की माँ) कलावाती उस समय सुर्खियों में आई जब 2008 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी उसके घर पहुंचे और बाद में संसद में किसान आत्मह्त्या ग्रस्त इलाके में गरीब किसान विधावाओं के लिए प्रतीक  के तौर पर  कलावती का उल्लेख किया . इस उल्लेख ने उसे ‘पोस्टर वुमन’ बना दिया . इसके बाद सुलभ इंटरनेशनल ने उसे 36 लाख रुपये देने की घोषणा की और पहली किश्त के तौर पर ६ लाख रुपये का भुगतान भी किया , बाद में 30 लाख रुपये उसके नाम से बैंक में जमा करवा दिए . उसे दूसरी सरकारी सहायता भी महाराष्ट्र सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई  .

पिछले छः सालों में कलावती 
सुर्ख़ियों में आने के बाद और सरकारी- गैरसरकारी सुविधाएं मिलने के बाद भी कलावती का दास्तान अंतहीन  दुःख और उससे उबरने के संघर्ष का दास्तान है . एक ओर तो सुलभ इंटरनेशनल के द्वारा बैंक में जमा किये गए रुपयों के ब्याज से उसके घर का मासिक खर्च पहले की तुलना में ज्यादा आसान हो गया तो दूसरी ओर उसके दामाद के बाद एक –एक कर दो बेटियाँ  मरती चली गई. विधवा बेटी के बच्चे और अपने बच्चे उसकी परवरिश के जिम्मे हैं . वह कहती है , ‘ अभी एक बेटी की शादी में तीन लाख रुपये खर्च हुए , जिसमें से डेढ़ लाख रुपये लड़के वालों ने लिए . और अब लड़का मेरी बेटी को मारने –पीटने लगा तो वह मेरे घर वापस आ गई है .’  इस बीच उसका घर झोपडी से ईटों के छोटे से घर में तब्दील हो गया , ठेके पर 6 एकड खेती भी ले ली . नियमित आमदनी के ये स्रोत यद्यपि उसके बच्चों की परवरिश को सुविधाजनक , बनाते हैं लेकिन क्रमशः  10 वीं और 12 वीं पढ़ रहे अपने बेटों के खर्चों को चलाने में खुद को असमर्थ बताते हुए वह कांग्रेस के नताओं की वादाखिलाफी को कोसने लगती है , ‘ कांग्रेस के अध्यक्ष माणिक राव ठाकरे ने कहा था कि वे बच्चों को गोद ले लेंगे , यानी दो बच्चों की पढ़ाई का खर्चा देंगे . कांग्रेस के नेताओं के कहने से मेरे घर पर बिजली का मीटर लग गया और ठाकरे ने कहा था कि 20 साल तक बिजली का कोई  बिल नहीं आएगा , लेकिन बिजली का बिल भी मैं दे रही हूँ और बच्चों की पढाई भी जैसे –तैसे करवा रही हूँ .’ संपर्क करने पर माणिकराव ठाकरे इस सन्दर्भ में कुछ भी नहीं कह सके .

राजनीति की डगर और कलावती की राह 
2009 में कलावती के चुनाव लड़ने की घोषणा ने कांग्रेस के खेमे में हडकंप पैदा कर दिया था . कलावती कहती हैं , ‘ वह सब एक धोखा था , मुझे विदर्भ जनांदोलन समिति के नेता किशोर तिवारी के घर पर किसानों और किसान विधवाओं की हालात पर सवाल किये गए थे , जिसपर मैंने कहा था कि उनकी स्थिति बुरी है, किसी एक कलावती की मदद से सारी किसान –महिलाओं की समस्या का समाधान नहीं हो जाता . इसके बाद मुझसे चुनाव संबधी बात धोखे से कहवा ली गई थी .’ तिवारी कहते हैं कि उसके साथ किये गए वायदे जब पूरे नहीं हो रहे थे तो उसे न्याय दिलाने के लिए चुनाव में खड़े होने की घोषणा की गई थी . कलावती के अनुसार वह उन दिनों काफी परेशान रही . 2011 में कलावती को भाजपा के लोगों ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवानी के मंच पर लाने की कोशिश की. उसी समय 24 साल की अपनी बेटी की मौत से दुखी कलावती इससे बचने के लिए घर से गायब हो गई थी .

तालेगाँव में एक किसान विधवा के घर सोनिया गांधी , 2008 में 

बड़े नेताओं के आने से नहीं सुधरते हाल  :
किसान नेता विजय जावंधिया कहते हैं ,‘ किसी एक को ब्रांड बनाने से ज्यादा जरूरी है समस्या का सही समाधान’ . पिछले दिनों कलावती के गाँव में ही एक और किसान ने आत्मह्त्या कर ली, जिसकी पत्नी अपने चार बच्चों के साथ  जीवन –संघर्ष कर रही है . वायफड़ में , जहां मनमोहन सिंह ने 2006में किसानों के लिए पॅकेज और कर्जमाफ़ी की घोषणा की थी , वहाँ मनमोहन सिंह के आने के पहले तक कोइ आत्महत्या नहीं हुई थी , जबकि उसके बाद दो आत्महत्याएं हो गईं. वर्धा के तालेगाँव में किसान विधवा रंजना देशमुख से मिलकर सोनिया गांधी ने 18 जुलाई , 2008 को उसे 1 लाख का चेक दिया था . उसके पति की मौत का मुख्य कारण था उसके चार एकड़ जमीन का गाँव के जल निकास में डूब जाना , वह समस्या सोनिया गांधी के जाने बाद काफी सालों तक बनी रही.




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