मीना खोंड की दो कवितायें

मीना खोंड
मीना खोंड कवितायें लिखती हैं, लन्दन  में रहती हैं. संपर्क : meenakhond@gmail.com
१. 

क्या पूछते हमें
कैसे रहे ? कैसे जीए ?
हम तो बस
उन्हीं के हो गए
उन्होंने अपनाया
हम न हमारे रहे
उनके इशारे चलते रहे
बस, हम जीते रहे

क्या पसंद , नापसंद क्या
बेमतलब सवाल रहे
वे कहते रहे
हम सुनते रहे
अपने लिए , अपनी मर्जी से कैसे जीते !
आखिर औरत हूँ
कन्यादान में जो मिली हूँ
स्वतंत्र देश की गुलाम नागरिक हूँ


2. 

तेरा उडता आंचल
तेरा बहता काजल
गहरा अह्सास
कौन पह्चानता ?

दुःख दर्द आहें
आंसू भरी निगाहें
अर्थ उनका
कौन समझता ?


पल भर की देहभूख
पल भर का देह सुख
अस्तित्व तुम्हारा
यहीं सिमटता

तू माता भगिनी
तू कांचन कामिनी
तेरी एक ही औरत जात
हर कोई  समझता
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