पंकज चौधरी की कविताएं

पंकज चौधरी
पंकज चौधरी मूलतः कवि और पेशे से पत्रकार हैं . कविता संग्रह 'उस देश की कथा' प्रकाशित। सम्‍मान/पुरस्‍कार- प्रगतिशील लेखक संघ का 'कवि कन्‍हैया स्‍मृति सम्‍मान', बिहार राष्‍ट्रभाषा परिषद का 'युवा साहित्‍यकार सम्‍मान' और पटना पुस्‍तक मेला का 'विद्यापति सम्‍मान' ।कविताएं गुजराती और अंग्रेजी में अनूदित। संपर्क: 09910744984


( पंकज चौधरी की कविताओं के अभिधात्मक , सपाट वाक्यों को पढ़ते हुए  पाठक के भीतर आक्रोश , क्रोध , दुःख , जुगुप्सा , खुशी , आत्मविश्वास के प्रबल भाव बनते जाते हैं - सहज वाक्यों , शब्दों में कही गई इन कविताओं की व्यंजनात्मक व्याप्ति बहुत तीव्र है )

1. कैसा देश, कैसे-कैसे लोग 

कल तक जो बलात्कार  करते आया है
और बलत्कृत  स्त्री  के गुप्तांगों में बंदूक चला देते आया है
कल तक जो अपहरण करते आया है
और फिरौती की रकम न मिलने पर
अपहृत की आंखें निकालकर
और उसको गोली मारकर
चौराहे के पैर पर लटका देते आया है

कल तक जो राहजनी करते आया है
और राहगीरों को लूटने के बाद
उनके परखचे उड़ा देते आया है

कल तक जो बात की बात में
बस्तियां दर बस्तियां फूंक देते आया है
 और विरोध नाम की चूं तक भी होने पर
चार बस्तियों को और फूंक देते आया है

कल तक जिसे
दुनिया की तमाम बुरी शक्तियों के समुच्चय के रूप में समझा जाता रहा है
और लोग-बाग जिसके विनाश के लिए
देवी-देवताओं से मन्नितें मांगते आया है
आज वही छाती पर
कलश जमाए लेटा हुआ है दुर्गा की प्रतिमा के सामने

उसकी बगल में
दुर्गा सप्तशती का सस्व र पाठ किया जा रहा है
भजन और कीर्तन हो रहे हैं
लोग भाव-विभोर नृत्य  कर रहे हैं
उसकी आरती उतारी जा रही है
अग्नि में घृत, धूमन और सरर डाले जा रहे हैं
घंटी और घंटाल बज रहे हैं
दूर-दूर से आए दर्शनार्थी
अपने हाथों में फूल, माला, नारियल आदि लिए
उसकी परिक्रमा कर रहे हैं


उसके पैरों में अपने मस्तक को टेक रहे हैं
और करबद्ध ध्यानस्थ
एकटंगा प्रतीक्षा कर रहे हैं
उससे आशीर्वाद के लिए

ये कैसा देश है
और यहां कैसे-कैसे लोग हैं !

लहर है ……

लहर है
झूठ और फरेब की सवारी गांठने वालों की लहर है

लहर है
नफरत और घृणा का विष बोने वालों की लहर है

लहर है
पाखंड के टट्टुओं  की लहर है

लहर है
कच्चा गोश्त खाने वाले आदमखोरों की लहर है

लहर है
विज्ञान का तंत्रीकरण, मंत्रीकरण और जोशीकरण करने की लहर है

लहर है
चंद्रगुप्त  मौर्य को चंद्रगुप्त द्वितीय बताने वालों की लहर है

लहर है
तक्षशिला को भारत में करने की लहर है

लहर है
देश को 'हिन्दुस्थान' बनाने की लहर है

लहर है
हाशिमों, अब्दुल्लों, रहमानों को टुकड़े-टुकड़े कर देने की लहर है

लहर है
अंसारियों, कुरेशियों से बदला लेने की लहर है

लहर है
नाजनीनों की कोख में त्रिशूल भोंक देने की लहर है

लहर है
दिलीप कुमारों को पाकिस्तानी एजेंट बताने वालों की लहर है

लहर है
ग्राहम स्टेन्स और उनके मासूमों को जिंदा जला देने की लहर है

लहर है
जसोदा बेनों को वनवासों में भेजने की लहर है

लहर है
पिछड़ों को हनुमान बना देने की लहर है

लहर है
वाल्मींकियों को 'कर्मयोग' का पाठ पढ़वाने की लहर है

लहर है
बाबासाहेब को झूठे देवता बताने वालों की लहर है

लहर है
पुष्यमित्र शुंगों के लौटने की लहर है

लहर है
मनु की औलादों की बाढ़ आने की लहर है

लहर है
कबीर पर हंसने वालों की आमद बढ़ने की लहर है

लहर है
चार्वाकों को जिंदा जला देने की लहर है

लहर है
महात्माो बुद्ध पर शंकराचार्यों को बिठाने की लहर है

लहर है
भारत को आग का दरिया बना देने की लहर है

लहर है
अल्लाैह के विध्वंसकों की लहर है

लहर है
गांधी के हत्याहरों की लहर है

लहर है
पूरे देश को हाफ पैंट पहना देने की लहर है।


3. गरमी
भीषण गरमी है
आग के गोले बरस रहे हैं
पत्ता  तक नहीं हिल रहा

पाताल भी सूख गया होगा
पिछले पच्चीस सालों का रिकार्ड भंग हो रहा है ...........................................................
बड़े-बूढ़ों की गरमी
ऐसे ही निकल रही थी
और दूधमुंहे बच्चों  की गरमी घमोरियों में निकल रही थी !


4. ईसा और भगवान के लिए

जहां सबसे  ज्यादा प्रभु होंगे
शैतान भी वहीं सबसे ज्यादा होंगे

जहां सबसे ज्यादा नायक होंगे
खलनायक भी वहीं सबसे ज्यादा होंगे

जहां सबसे ज्यादा नम्रता होगी
उदंडता भी वहीं सबसे ज्यादा होगी

जहां सबसे ज्यादा दरियादिली होगी
क्षुद्रता भी वहीं सबसे ज्यादा होगी

जहां सबसे ज्यादा शंकराचार्य होंगे
व्यंभिचारी भी वहीं सबसे ज्यादा होंगे

जहां सबसे ज्यादा धर्म होगा
धर्म की हानि भी वहीं सबसे ज्यादा होगी

जहां सबसे ज्यादा जनता होगी
जनता के नाम पर लूट भी वहीं सबसे ज्यायदा होगी

जहां सबसे ज्यादा नास्तिक होंगे
आस्तिक भी वहीं सबसे ज्यादा होंगे

जहां सबसे ज्यादा पूजा होगी
कर्मकांड भी वहीं सबसे ज्यादा  होंगे

जहां जातिवाद का विरोध सबसे ज्यादा होगा
जातिवाद भी वहीं सबसे ज्यादा होगा

जहां सत्य के सबसे ज्यादा प्रयोग होंगे
सत्य  के पाखंड भी वहीं सबसे ज्यादा होंगे

जहां सबसे ज्यादा विचार होंगे
बेईमानी की गुंजाइश भी वहीं सबसे ज्यादा होगी

और जहां विचार कम से कम होंगे
ईमानदारी भी वहीं सबसे ज्यादा होगी।


5. मैं हार नहीं मानूंगा, तो तुम जीतोगे कैसे

मैं हार नहीं मानूंगा
तो तुम जीतोगे कैसे

मैं रोउंगा नहीं
तो तुम हंसोगे कैसे

मैं दुखी दिखूंगा ही नहीं
तो तुम सुख की अनुभूति करोगे कैसे

मैं ताली ही नहीं बजाउंगा
तो तुम ताल मिलाओगे कैसे

मैं अभिशप्त नायक ही सही
लेकिन तू तो खलनायक से भी कम नहीं

मैं खुददारी की प्रतिमूर्ति ही सही
लेकिन तू तो किसी पतित से कम नहीं

माना कि प्रकृति भी मेरे साथ नहीं
लेकिन प्रकृति भी तो सदैव तेरी दास नहीं

तुम मुझे क्या  अपमानित करोगे
तुम तो खुद सम्मा‍नित नहीं

तुम मुझे औकात में क्या रखोगे
तुम्हारी खुद की तो कोई औकात नहीं

तुम मुझे क्याा डराओगे
तुम तो मुझसे खुद डरते हो

मेरे उपर तुम क्या शक करोगे
विश्वापस तो तुझे खुद अपने उपर भी नहीं

तुम मेरा रास्ता  क्या  रोकेगे
तुम्हारा रास्ता तो अपने आप है बंद होने वाला

मेरी इज्जरत तुम क्या  उतारोगे
तुम्हाजरी इज्जत तो खुद है तार-तार

तुम मेरा इतिहास क्या खंगालोगे
तुम्हारा इतिहास तो खुद है दाग-दाग

मैं राहु का वंशज ही सही
लेकिन तुम भी तो चंद्रमा के रिश्तेदार नहीं।
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